
Naami Giraami
यह हिंदी पॉडकास्ट आज तक रेडियो द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें प्रभावशाली और शक्तिशाली हस्तियों की जीवनियों पर चर्चा होती है। हर सोमवार नया एपिसोड आता है, जिसमें भारत और दुनिया की प्रसिद्ध हस्तियों की कहानियाँ और जीवन यात्राएँ सुनाई जाती हैं। इसमें नायक, खलनायक, विद्वान, महारथी और कला जगत के चमकते सितारे शामिल हैं। साथ ही इतिहास में अमर हो चुकी हस्तियों के उजले और स्याह दोनों पहलुओं पर प्रकाश डाला जाता है।
Episodes

‘गुनाहों का देवता’ लिखने वाले धर्मवीर भारती ने संपादक की कुर्सी क्यों ठुकरा दी?: नामी गिरामी, Ep 303
सूरज और सितारे ठंडे…ये शब्द किसी साधारण कवि के नहीं, बल्कि उस लेखक की आवाज़ हैं, जिसने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी…धर्मवीर भारती. इलाहाबाद की गलियों से ‘धर्मयुग’ की बुलंदियां छूने तक, उनकी कहानियां सवालों, संघर्षों और संवेदनाओं से भरी है. ‘गुनाहों का देवता’ के चंदर-सुधा हो या ‘अंधा युग’ के पात्र, भारती की हर रचना ने लोगों के दिल को छुआ. लेखन, नाटक, पत्रकारिता - हर मंच पर उन्होंने शब्दों से समझौता

वर्ल्ड वॉर में जासूसी करने वाली डांसर, 50 लाख रुपये के चक्कर में बर्बाद हो गई: नामी गिरामी, Ep 302
एलाइज़ और सेंट्रल पॉवर्स. दो बड़े खेमे आमने सामने थे. एक तरफ़ फ्रांस, रशिया, ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका. दूसरी तरफ़ ऑस्ट्रिया-हंगरी, जर्मनी, बुल्गारिया और ऑट्टोमन साम्राज्य. लेकिन इस जंग के बीच एक कहानी पनपी. एक ऐसी औरत की कहानी जिसकी ख़ूबसूरती क़ातिल थी. एक ऐसी कलाकार जो स्टेज पर चढ़ते ही सबको वश में कर लेती थी. एक ऐसी जासूस जिसपर डबल एजेंट होने के आरोप लगे. फिर क्या हुआ? जानने के लिए नामी गिरामी क

Princess Diana को हनीमून पर ही मिला बेवफाई का सबूत?: नामी गिरामी, Ep 301
इंग्लैंड की जनता उसे इतना प्यार करती थी कि 29 जुलाई, 1981 को उसकी शादी का हिस्सा करीब 75 करोड़ लोग बने. कोई रेडियो कोई टीवी के ज़रिए. जब 16 साल बाद उसकी मौत हुई तो करीब 250 करोड़ लोग उसके Funeral का हिस्सा बने. इन 16 सालों में बस ये आंकड़ा ही नहीं बदला था. लोगों का राजशाही को देखने का नज़रिया भी बदला था. लोगों ने Princess of wales को People’s Princess बनते देखा. लेकिन इन 16 सालों में क्या-क्या घटा

भारत को बजट समझाने वाला वकील एक फोटो की वजह से कैसे विवादों में फंस गया?: नामी गिरामी, Ep 300
नानी पालखीवाला सिर्फ एक वकील नहीं थे, वो भारत के संविधान की आत्मा की आवाज़ थे. एक शर्मीले छात्र से लेकर सुप्रीम कोर्ट के सबसे दमदार वकील तक का सफ़र. उन्होंने न सिर्फ अदालतों में ऐतिहासिक लड़ाइयां लड़ीं, बल्कि टाटा समूह के साथ भारत की आर्थिक दिशा भी तय की, पीवी पर्स केस, आपातकाल और अमेरिका में भारतीय राजदूत की भूमिका, हर मोड़ पर नानी का दृष्टिकोण एक मिसाल बना, सुनिए नानी की कहानी 'नामी गिरामी' में.

हवाई जहाज़ से डर, शाहरुख से नाराज़गी और शास्त्री से क्यों खास था मनोज कुमार का रिश्ता?: नामी गिरामी, Ep 299
एक कलाकार, जिसने अपनी फिल्मों के ज़रिए देशप्रेम को घर घर तक पहुंचाया. कभी अपनी फिल्मों के ज़रिए बेरोज़गारी पर प्रहार किया, कभी जय जवान जय किसान और कभी याद दिलाया कि भारत ने दुनिया को शून्य देकर गिनती करना सिखाया है. नामी गिरामी के इस एपिसोड में कहानी मशहूर फिल्म एक्टर डिरेक्टर मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार की.प्रड्यूसर: मानव देव रावतसाउंड मिक्स: रोहन भारती

हिटलर को हराने वाले चर्चिल ने 30 लाख लोगों को भूख से मरने क्यों दिया?: नामी गिरामी, Ep 298
विंस्टन चर्चिल को दुनिया दूसरे विश्वयुद्ध का महानायक मानती है. उनके जोशीले भाषणों ने ब्रिटेन को हिटलर से लड़ने की ताकत दी. मगर क्या आप जानते हैं कि इसी नेता ने भारत के साथ क्या किया? 1943 में बंगाल में भयंकर अकाल पड़ा. 30 लाख से ज्यादा लोग भूख से मर गए, लेकिन चर्चिल ने जानबूझकर मदद नहीं भेजी. वो महात्मा गांधी को "नंगा फकीर" कहकर अपमानित भी करते थे. जिस नेता ने यूरोप को बचाया, उसी ने भारत को क्यों

मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने छत्रपति शिवाजी को श्रद्धांजलि देते हुए क्या कहा था?: नामी गिरामी, Ep 297
आगरा के महलों से दक्कन की रणभूमि तक, एक नाम जिसने मुग़लिया सल्तनत को शिखर तक पहुंचाया लेकिन जिसकी विरासत विवादों से घिरी रही—औरंगज़ेब. 14 साल की उम्र में गुस्साए हाथी से भिड़कर शाहजहां का दिल जीतने वाला यही शहज़ादा आगे चलकर अपने भाई दारा शिकोह का सिर कलम कर पिता के सामने रख देता है. मुग़ल सल्तनत का छठा बादशाह, जिसने 49 साल राज किया—कभी धर्मनिष्ठ, तो कभी क्रूर शासक कहा गया. औरंगज़ेब कौन था? एक बादश

BLA से पहले पाकिस्तान को हिला देनेवाले बलूच सरदार बुगती की कहानी!: नामी गिरामी, Ep 296
गेंहुआ रंग के चेहरे पर सफेद दाढ़ी. पैनी नाक और तनी हुई आँखें. इसी चेहरे को लोग शेर-ए-बलूचिस्तान पुकारा करते थे. यही चेहरा था, जो पाकिस्तान के सियासतदानों की नींदें उड़ाता था. इसी चेहरे को याद कर आज भी दुनियाभर के कई हिस्सों में बलूचिस्तान मूवमेंट पहले से कहीं ज़्यादा पुख्ता है. यह वह शख्स था, जिसने पाकिस्तान की जम्हूरियत को बनते और फिर टूटते देखा. ताज्जुब कि बात ये है कि इस आदमी को पाकिस्तान की सर

Versace बनाने वाले को किसने और क्यों मारी थी गोली?: नामी गिरामी, Ep 295
इटली के एक छोटे से शहर का लड़का जिसने अपना बचपन फुटबॉल नहीं, रंगों और डिज़ाइंस से खेलते हुए बिताया. वो मिलान पहुंचा तो उसने अपने डिज़ायंस से सबको चौंकाया. दुनिया को बताया कि बोल्डनेस भी स्टाइलिश हो सकती हैं. वक्त के सभी बड़े लोग उसके प्रशंसक थे. चाहे एल्टन जॉन हो, प्रिंसेस डायना या मडोना. लेकिन फिर क्या हुआ कि उसके बंगले के सामने एक सनकी ने उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया? ‘नामी गिरामी’ के इस

हज़ार दीनार कीमत, गुलाम से बना सेनापति…मगर कब्र तक लापता!: नामी गिरामी, Ep 294
एक हज़ार दीनार में खरीदा गया एक गुलाम जिसने अपनी चतुराई, बहादुरी और सत्ता के खेल में महारत हासिल कर दिल्ली सल्तनत की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने का सफर तय किया. मलिक काफ़ूर—एक ऐसा नाम, जो कभी युद्ध के मैदान में अपनी तलवार की चमक से पहचाना गया तो कभी राजमहल के षड्यंत्रों में उलझा. गुजरात के खंभात की मंडी से दिल्ली सल्तनत का सेनापति बनने तक उसकी यात्रा सत्ता, विश्वासघात और महत्वाकांक्षा से भरी रही. वो

नाटककार सफ़दर हाशमी की हत्या के अगले 48 घंटों में क्या हुआ?: नामी गिरामी, Ep 293
लाल कपड़े पहने हुए करीब 15,000 कम्यूनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता, सत्यजीत रे, भीष्म साहनी, वीपी सिंह समेत देशभर से आए हुए कलाकार. सब एक ही शख्स से जनाज़े में शामिल होने के लिए आए थे. लाल कपड़े में लिपटा हुआ वो शख्स जिसका नाम सफ़दर हाशमी था. वही सफ़दर जिसके बिना भारत के थिएटर का इतिहास अधूरा है. वही सफ़दर जिसने नुक्कड़ नाटकों ने आम जनता तक थिएटर की पहुंच आसान की. वही सफ़दर जिसने लोगों को सिखाया कि कैसे

यूपी की सियासत से दिल्ली के तख़्त पर कैसे पहुंचीं शीला दीक्षित?: नामी गिरामी, Ep,291
1998 की सर्दियों में, दिल्ली की राजनीति में जबरदस्त हलचल थी. इंडिया गेट पर एक गरमागरम बहस के दौरान, दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज और कांग्रेस नेता शीला दीक्षित आमने-सामने थीं. इसी बहस में शीला दीक्षित के पक्ष में माहौल बदला, जिसने दिल्ली की सियासत को हमेशा के लिए बदल दिया. जो शीला दीक्षित कभी उत्तर प्रदेश की कन्नौज सीट से चुनाव लड़ चुकी थीं, वो आखिर कैसे दिल्ली की सत्ता तक पहुंचीं? क

तमिलनाडु का ‘वरदा भाई’ मुंबई में हाजी मस्तान का चहेता कैसे बना?: नामी गिरामी, Ep 290
एक शख्स था जिसका एक दौर में बंबई में रौब था. ये रौब उस शख्स का था जिसने वेल्लूर से आकर बंबई शहर में अपना सिक्का जमाया, वो भी ऐसा कि पुलिस उसके इलाके में जाने से डरती थी. वो जिस गणपति पांडाल का ज़िम्मा उठाता वहां बड़े से बड़ा हीरो आकर नाचता. नाम ऐसा की बड़ी बड़ी मैग्ज़ीनों ने उसे कई दफा अपने कवर पेज में जगह दी. स्टाइल ऐसा की तमाम फिल्म मेकर्स ने उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाई. यहां तक की अमिताभ बच्चन ने

वेस्टइंडीज़ के डरावने गेंदबाज़ों के बीच मैल्कम मार्शल सबसे ख़तरनाक क्यों थे?: नामी गिरामी, Ep 289
क्रिकेट की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय के साथ और भी बड़े हो जाते हैं और मैल्कम मार्शल उन्हीं में से एक थे. वेस्ट इंडीज के इस दिग्गज तेज गेंदबाज ने अपनी गति, सटीकता और स्विंग से क्रिकेट जगत को मंत्रमुग्ध कर दिया उनका कद अन्य गेंदबाजों के मुकाबले छोटा था, लेकिन उनकी उपलब्धियां आसमान छूती थीं, सुनिए कंप्लीट फ़ास्ट बॉलर की पूरी कहानी 'नामी गिरामी' में. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक्स- नितिन र

Osho का संन्यासी, पोर्न का पक्षधर, कालजयी फिल्मों का जनक विजय आनंद: नामी गिरामी, Ep 288
फिल्म इंडस्ट्री में ओशो से प्रभावित होने वालों की लंबी सूची है लेकिन उसी इंडस्ट्री में एक नाम और भी था जिसका ओशो से तगड़ा मोहभंग हुआ. ये वही डिरेक्टर था जिसने शम्मी कपूर को स्थापित किया, ऐसे गाने शूट किए जो आइकॉनिक बन गए. उनके व्यूफाइंडर से गाइड, जॉनी मेरा नाम, नौ दो ग्यारह जैसी फिल्में निकली. जो आज भी दुनियाभर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में शुमार होती है. मगर इन फिल्मों को बनाने वाला शख्स ओशो तक कैस

करियर का पहला जादू फेल, फेक होने का आरोप, फिर भी कैसे पद्मश्री बन गए पीसी सरकार?: नामी गिरामी, Ep 287
साल 1956. अप्रैल की एक सुबह. हेडलाइंस चिल्ला रही थीं. “Girl cut in half - Shock on TV"- "Sawing Sorcar alarms viewers". देखते ही देखते न्यू योर्क में उस भारतीय कलाकार का शो हाउसफुल हो गया. ये सही मायने में उस कलाकार का जादू ही था कि उसने वेस्टर्न जादूगरों की दुनिया में भारतीय जादू को नई पहचान दिलाई. दुनिया में घूम घूम कर लोगों को अपने जादू का मुरीद बनाया और इतना सम्मान पाया कि आज उसके नाम पर कोलका

अकबर का असली वारिस जहांगीर के बजाय नूरजहां को क्यों माना गया?: नामी गिरामी, Ep 286
जहांगीर की सबसे छोटी पत्नी, जिनके बारे में कहा जाता है कि सल्तनत को पर्दे के पीछे से वही चलाती थीं. कई मौकों पर उन्होंने बादशाह जहांगीर की जान भी बचाई और ऐसे मक़बरे बनवाए, जिनके बारे में कहा जाता है कि ताजमहल बनाने में उनकी नकल की गई. इन सबके बावजूद, उन्हें काल कोठरी में डाल दिया गया. उनकी ज़िंदगी से जुड़े किस्से सुनिए 'नामी गिरामी' में, नितिन ठाकुर से. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक्स- रोहन

‘मोहना’ से डॉक्टर मनमोहन सिंह तक का सफर, पूर्व PM के सुने अनसुने किस्से!: नामी गिरामी, Ep 285
एक नेता जिनके विचारों ने भारत को आर्थिक उदारीकरण के मार्ग पर अग्रसर किया, एक नेता के तौर पर उनकी विनम्रता ने राजनीति को सादगी और गरिमा का नया आयाम दिया. किसी ने accidental prime minister बुलाया गया, कभी उनकी नीतियों के लिए सराहा गया तो कभी उनकी सरकार भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे. मगर रिज्यूमे को खोलकर देखा जाए तो 4-5 पन्ने तो सिर्फ उन पदों के विवरण से भर जाते हैं बाकी पन्ने उनकी डिग्रियों और क्वाल

तिहाड़ में दसवीं पास करने वाले CM की कहानी!: नामी गिरामी, Ep 284
देश के दिल में बसा है एक राज्य हरियाणा. वही हरियाणा जो खेल-खलिहान के लिए हमेशा जाना जाता है. लेकिन हरियाणा साथ ही जाना जाता है राजनेताओं के लिए. इस एपिसोड में कहानी एक ऐसे नेता की जो 5 बार हरियाणा का मुख्यमंत्री बना. कहानी हरियाणा की राजनीति के बड़े नाम, भारत के छठे उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के बेटे और 5 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला की. सुनिए ‘नामी गिरामी’ में प्रड्यूसर: मानव

हॉलीवुड तक तबले की थाप पहुंचने वाले ज़ाकिर हुसैन को 'मनहूस' क्यों कहा गया: नामी गिरामी, Ep 283
एक उस्ताद, जिसका नाम तबले की मधुर मगर गंभीर ताल की तरह देश-दुनिया में गूंजा. ये नाम जहां भारतीय शास्त्रीय संगील में हमेशा इज़ज्त से लिया गया वहीं इंटरनेशनल म्यूज़िक के गलियारों में भी इस तबला वादक ने अपने संगीत से छाप छोड़ी. इस म्यूज़िशियन ने जहां ग्रैमी जैसे इंटरनेशनल ख्याति वाले अवॉर्ड्स जीते, वहीं भारत में पद्म श्री, पद्म विभूषण और पद्म भूषण से भी सम्मानित हुए. आज के नामी गिरामी में कहानी इसी

अमिताभ बच्चन क्यों हृषिकेश मुखर्जी को कहते थे ‘गॉडफादर’?: नामी गिरामी
डिरेक्टर जिसने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को निखारा, डिरेक्टर जिसने राजेश खन्ना के साथ मिलकर भारतीय सिनेमा को बेहतरीन फिल्में दीं, आर्टिस्ट जिसने महान निर्देशक बिमल रॉय के साथ रहकर काम सीखा और जिसने आनंद, मिली, गोलमाल जैसी फिल्में देकर भारतीय सिनेमा को ये सिखाया कि सादा फिल्में बनाकर भी थियेटर्स को भरा जा सकता हैनामी गिरामी के इस एपिसोड में कहानी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के ‘ऋषि दा’, मशहूर एडिटर, र

कविताओं से 'भारत भाग्य विधाता' को चुनौती देने वाला JNU का ब्रांड अंबेसडर 'विद्रोही' : नामी गिरामी, Ep 281
रमाशंकर यादव विद्रोही यानि ऐसा तूफ़ान जो इंसानी शरीर में सिमटा हो. रूढ़ियों के घाट से टकराने वाली शब्दों की एक बेतहाशा लहर. क्रांति और कविता के बीच का पुल. विद्रोही की कविताएं केवल शब्द नहीं एक चुनौती भी थी. एक सवाल और अक्सर एक मुंहतोड़ जवाब भी. उनकी कविता की ऐसी शैली, जैसे कोई किसान हल चलाते हुए आसमान से सवाल कर रहा हो. जो दुनिया की किसी भी परिभाषा में बंधने को तैयार न हो. जिसके पास न कोई अपना ठि

ब्रूस ली से चोट खाकर भी क्यों खुश हुए थे जैकी चैन?: नामी गिरामी, Ep 280
दुनियाभर में कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी उम्र भले ही कम हो लेकिन उपलब्धियां ज़्यादा होती हैं. कई बार ऐसे ही लोगों के जाने के बाद भी उनका नाम हमेशा लोगों की ज़बान पर रह जाता है और तस्वीर लोगों की याद में. मगर कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनकी तस्वीरें लोगों के कमरों मे भी पाई जाती हैं. आज के नामी गिरामी में कहानी मशहूर मार्शल आर्टिस्ट और एक्टर ली जून-फैन उर्फ ब्रूस ली की जिन्होंने अपने 32 साल के जीवन मे

भारतीय जासूस जिसे इंदिरा गांधी ने दिया ‘ब्लैक टाइगर’ का टाइटल!: नामी गिरामी, Ep 279
भारत की इंटेलिजेंस एजेंसी R&AW का शानदार जासूस जिसे आज भी भारत के सबसे बेहतरीन जासूसों में से एक माना जाता है. वो जिसकी जांबाज़ी से प्रभावित होकर खुद उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उसे ब्लैक टाइगर का नाम दिया था. वो जो पहचान बदलकर पाकिस्तान भी गया और फिर पाकिस्तान की सेना में शामिल भी हुआ. जिस वजह से भारत का शैतानी पड़ोसी अपने नापाक इरादों में नाकाम रहा. सुनिए इंडियन स्पाई रवींद्र कौश

अंतिम सांस तक रियाज़ करने वाली लोकगायिका जो छठ पर्व की पहचान बन गईं: नामी गिरामी, Ep 278
पिछले चार दशकों में छठ गीतों का पर्याय बन चुकीं शारदा सिन्हा संगीत के प्रति अंतिम सांस तक ईमानदार बने रहने की अनूठी मिसाल थीं. 'बिहार कोकिला' के नाम से मशहूर शारदा सिन्हा ने स्त्रियों के विरह और सुख-दुख को संगीतमय अभिव्यक्ति दी. मैथिली और भोजपुरी गीतों में उनका योगदान बेहद अनूठा रहा. सुनिए उनकी ज़िंदगी के छूए-अनछुए पहलू नामी गिरामी में. प्रड्यूसर: अतुल तिवारी साउंड मिक्स- कपिल देव सिंह

इस्मत और मंटो किस राइटर से जलते थे?: नाम गिरामी, Ep 277
इस लेखक ने अपने जीवन में बहुत लिखा. 20 नॉवल, 30 कहानी संग्रह, दर्जनों रेडियो नाटक और कुछ फिल्में भी. मगर उसका चमत्कार ये था कि इसने कहानियां, रेखाचित्र, संस्मरण, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, रोमांस, ट्रेजडी सब लिखा और सब शानदार. और दम तोड़ा तो भी लिखते लिखते. उनके लिखने के बारे में ही एक बार इस्मत चुग़ताई ने मंटो से कहा था- “मंटो मैं और तुम तो कूड़े के ढ़ेर उधेड़ते हैं, वो अपनी लाइनों से बेल बूटे टांकत

हिटलर के बाद यहूदियों को सबसे गहरा जख़्म देने वाला सिनवार इज़रायल की जेल से कैसे बाहर निकला?: नामी गिरामी, Ep 276
दुनिया उसे हमास का नेता, फिलिस्तीनियों का मसीहा और ईरान का दोस्त मानती थी लेकिन याह्या सिनवार ख़ुद को इज़रायल का विनाशक मानता था. इस एपिसोड में जानेंगे याह्या सिनवार के बारे में, जिसने अपनी जवानी के ज़्यादातर साल इज़रायल की जेलों में बिताए. उसी ने इज़रायल पर अब तक के सबसे बड़े हमले की योजना बनाई, और इज़रायल की सेना जिसे शैतान का चेहरा मानती थी. सुनिए 'नामी गिरामी' में उसकी ज़िंदगी के किस्से. प्रड्

'जंगली’ एक्टर जिसने सिनेमा को सिखाया ‘Twist’: नामी गिरामी, Ep 275
शोमैन राज कपूर, ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार और स्टाइल स्टेटमेंट देव आनंद की सीरियस एक्टिंग के दौर में किसे पता था कि भारतीय सिनेमाघरों से ‘याहू’ की आवाज़ उठने लगेगी. किसे पता था कि इन दिग्गज एक्टर्स को चुनौती देता एक थिरकता, उछलता, कूदता सितारा सबके दिलों पर यूं छाएगा जैसे कोई ‘दीवाना बादल’ हो. किसे पता था कि आसमान से आया फरिश्ता प्यार के पैगाम के साथ साथ भारतीय सिनेमा में वेस्टर्न स्टाइल डांस का तड़

नमक से लेके गाड़ी को घर घर तक पहुंचाने वाला उद्योगपति!: नामी गिरामी, Ep 274
भारतीयों की एक पूरी पीढ़ी गुज़री है जिसने अक्सर एक दौर में अमीरी और समृद्धि का पर्याय टाटा नाम के सरनेम को माना है. मगर एक टाटा परिवार का एक वंशज ऐसा भी था जिसने टाटा के फ्लोर पर काम भी किया और फिर उसी फ्लोर पर राज भी किया. नैनो और इंडिका जैसी कारों को बनाया, तो जैगुआर जैसे कार कंपनियों का अधिग्रहण भी किया. ‘नामी गिरामी’ के इस एपिसोड में कहानी मशहूर उद्योगपति रतन टाटा की. प्रड्यूसर: मानव देव रावत

कहानी हरियाणा के विकास पुरुष से तानाशाह तक का सफर तय करने वाले नेता की : नामी गिरामी, Ep 273
हरियाणा के चार बार मुख्यमंत्री रहे चौधरी बंसीलाल के बारे में आम लोगों की मिली-जुली धारणा है. बंसीलाल अपने राजनीतिक कार्यकाल में कई कारणों से मशहूर रहे. राज्य में नहरों का जाल बिछाने, पूरे प्रदेश में बिजली की व्यवस्था और गांव-गांव सड़कें पहुंचाने वाले बंसीलाल पर कुंवारे लड़कों की जबरन नसबंदी का आरोप भी लगा. बंसीलाल को देवीलाल ने हथकड़ी पहनाकर खुली हुई पुलिस-जीप में हरियाणा की सड़कों पर क्यों घुमाया?

संत तुकाराम ने अपना सारा लिखा नदी में क्यों बहा दिया था?: नामी गिरामी, Ep 272
किसी कवि की रचना कितनी महान है यूं तो इसके कई मापदंड है. मगर उन में से एक बड़ा फैक्टर है पल पल गुज़रता वक्त. यानि अगर कोई रचना बीतते सालों के साथ भी उतनी ही प्रासंगिक बनी रहे जितनी वो पहले थी. तो कई विद्वान उसे महान की श्रेणी में रखते हैं. मराठी भाषा में संत तुकाराम की कविताओं और रचनाओं को महान कहा जाने का एक बड़ा कारण यही है. संत तुकाराम की रचनाओं को इतिहासकार 400 साल से पुराना मानते हैं मगर आज भ

गवर्नर को थप्पड़ जड़ने वाला 'ताऊ', जिसने ठुकराया प्रधानमंत्री का पद: नामी गिरामी, Ep 271
यह कहानी उस समय की है जब देश अंग्रेज़ों के अधीन था, लेकिन आज़ादी की चाह बढ़ रही थी। 1928 में हरियाणा के मोगा में लाला लाजपत राय के भाषण को सुनकर एक 16 साल के लड़के ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का निर्णय लिया. पढ़ाई छोड़कर जेल में समय बिताया और फिर देश बदलने की चाहत से राजनीति में आकर छा गया. ऐसा छाया कि पहले हरियाणा को अलग राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और फिर उसी हरियाणा का दो बार म

कॉमरेड सीताराम येचुरी- मनमोहन सरकार में लेफ्ट की आवाज़: नामी गिरामी, Ep 270
JNU की छात्र राजनीति से हुई जिसके राजनीतिक जीवन की शुरुआत, 5 भाषाओं में पकड़ ऐसी कि जिसको चाहे अपना बना लें, एक ऐसा क्रांतिकारी कॉमरेड जिसने इंदिरा गांधी से मांगा इस्तीफा, जो कांग्रेस की सरकार में बनकर रहा लेफ्ट की आवाज़ और जिसके भाषण अक्सर दिलाते है संसदीय परंपराओं की याद. सुनिए कहानी भारतीय राजनीति के मशहूर कॉमरेड सीताराम येचुरी की ‘नामी गिरामी’ में. प्रड्यूसर: अतुल तिवारी साउंड मिक्स: कपिल देव

गांधी को जिसने अहिंसा का पाठ पढ़ाया और शेक्सपियर को नकार दिया: नामी गिरामी, Ep 269
दुनिया के किसी कोने में जब भी महान लेखकों की बात होती है कुछ नाम हर जगह मुंह पर सबसे पहले आते हैं, लियो टॉल्स्टॉय उन्हीं में से एक हैं. टॉल्स्टॉय का लिखा सबकुछ बार-बार पढ़ने लायक है. रूस के इस लेखक से दुनिया के कई नेता प्रेरणा लेते हैं, गांधी उनमें से एक थे. उन्हें कई बार नोबल के नॉमिनेट किया गया लेकिन टॉल्स्टॉय ख़ुद इसके ख़िलाफ़ थे. कुछ सवालों ने उन्हें ज़िंदगीभर परेशान किया, जिसके पीछे वो लगातार

इंदिरा का चहेता, राजीव का दुश्मन, जिसने बदली राजनीति: नामी गिरामी, Ep 268
“राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है” और “मंडल कमीशन हाय हाय”. ये दो नारे देश में अलग अलग दौर में, मगर एक ही इंसान के लिए लगे. बस एक बार वो सत्ता से लड़ रहा था, और एक बार वो खुद सत्ता में था. नामी गिरामी के इस एपिसोड में सुनिए कहानी इंदिरा को मेंटर मानने वाले, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम, मांडा रियासत के राजा और भारत के 7वें प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्सि

बिस्मिल्लाह खान के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ गया था अमेरिका?: नामी गिरामी, Ep 267
देश में जब जब शहनाई का नाम लिया जाता है...नाम लिया जाता है बिस्मिल्लाह खां का. बिहार के डुमरांव में जन्में बिस्मिल्लाह ने कैसे शादियों में बजने वाले वाद्य यंत्र को दुनिया भर में ख्याति का पात्र बनाया? कान्हा ने बिस्मिल्लाह को कौनसा राग सिखाया? बनारस के घाट से उनके प्यार की क्या पराकाष्ठा रही? सुनिए नामी गिरामी में जमशेद क़मर सिद्दीकी से. प्रड्यूसर: चेतना काला साउंड मिक्सिंग: सचिन द्विवेदी.

‘गंगा, AMU, नफीसा’ का वो बेटा जिसने ज़िद्द करके लिखा 'महाभारत': नामी गिरामी, Ep 266
एक लेखक जिसने ज़िद करके भारतीय टीवी जगत का सबसे पॉपुलर शो महाभारत लिखा, गरीब मुसलमानों का 'आधा गांव ' में मार्मिक चित्रण किया, लम्हे और गोलमाल समेत कई फिल्मों में शानदार डायलॉग लिखे, और उसूलों पर अड़कर अपने पिता के खिलाफ़ कम्युनिस्ट कैंडिडेट को चुनाव लड़वाया. सुनिए कहानी मशहूर लेखक और डायलॉग राइटर 'राही मासूम रज़ा' की ‘नामी गिरामी’ में. प्रड्यूसर: मानव देव रावत साउंड मिक्सिंग: कपिल देव सिंह

कम्युनिस्टों का वो मुख्यमंत्री जिसके राज में दरका 'लाल किला': नामी गिरामी, Ep 265
आज नामी गिरामी में सुनिए कहानी उस शख्स की जिसने देखा बंगाल के औद्योगीकरण का सपना, जिसे संसद में कहा गया बेस्ट सीएम, जो नाटककार थे, कवि थे, गायक थे और भद्रलोक के भद्रपुरुष के नाम से मशहूर बंगाल की राजनीति में चर्चित भी थे. सुनिए कहानी बुद्धदेव भट्टाचार्या की. साउंड मिक्सिंग - कपिल देव सिंह

मैच फ़िक्सिंग के तूफान से टीम इंडिया को बाहर निकालने वाला कोच: नामी गिरामी, Ep 263
पिता से मिले क्रिकेट के पैशन को लेकर जिस खिलाड़ी ने दी भारतीय टेस्ट को शानदार पारी, अपने संयमित खेल और हिम्मती टेक्नीक के कारण जिसे कहा गया ‘Gutsy’ और ‘Great wall’, कैरिबियन तेज़ गेंदबाजों की खतरनाक गेंदो को झेलकर भी जिसने साबित किया अपना हुनर और वो खिलाड़ी जो मैच फिक्सिंग के तूफान के बीच साबित हुआ इंडियन टीम का लाइटहाउस. नामी गिरामी में आज सुनिए कहानी मशहूर इंडियन क्रिकेटर, नेशनल सिलेक्टर और कोच

सबसे ताक़तवर सरकारी अफसर जिसने इंदिरा- अटल का पद्म पुरस्कार नकारा: नामी गिरामी, Ep 262
फरवरी की ठंड में भूरे, बेजान, पत्ते चरमराते हुए शाख डाल से टूट रहे हैं. देश की जनता इंतज़ार में हैं, इंतज़ार सूरज की गर्म किरणों का, नई कोंपलों के फूटने का, सर्द रातों के अंत का. नेहरू और शास्त्री को गंवाने के बाद निगाहें इंदिरा पर हैं. 1967, रायबरेली में प्रचार करती इंदिरा. इंदिरा, जिन्हें अभी कुछ वक़्त पहले ही लोहिया ने संसद में गूंगी गुड़िया माना.... खत लिख रहीं हैं. ये खत लंदन में बैठे उस व्यक्त

कहानी नकली नोट छापकर ब्रिटिश हुकूमत की कमर तोड़ने वाले गुमनाम क्रांतिकारी-कवि की: नामी गिरामी, Ep 261
'पूर्वी' गीत-शैली के बादशाह, लोक-रंगकर्मी भिखारी ठाकुर के गुरु, क्रांतिकारी और कवि महेंदर मिसिर को समाज ने क्यों भुला दिया? महेंदर मिसिर की गायकी में वह क्या खूबियां थी कि जिसके लिए तवायफों ने अपने गहने उतार दिए? एक कवि-गायक को नकली नोट क्यों छापने पड़े? सुनिए महेंदर मिसिर के जीवन के लगभग सभी पहलूओं को 'नामी गिरामी' में.

लाहौर दिल्ली में जिनके नाम से अस्पताल हैं वो सर गंगाराम कौन थे?: नामी गिरामी, Ep 260
सर गंगाराम जिन्हें Father of Modern Lahore कहा गया, गंगा राम सिर्फ और सिर्फ़ इमारत और शहर बनाने में रूची नहीं रखते थे, उनका मकसद था वो बेहतर समाज बनाए. समाज सेवा के काम के लिए अंग्रेज़ी हुकूमत ने पहले उन्हें राय बहादुर का खिताब दिया और फिर ‘सर’ की उपाधी दी, सुनिए उनकी कहानी ‘नामी गिरामी’ में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक्स- कपिल देव सिंह

चीन को चकमा दे सिक्किम को भारत में मिलाने वाले पहले RAW चीफ की कहानी: नामी गिरामी, Ep 259
देश की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानि रॉ (RAW) के पहले प्रमुख आर. एन. काव (RN Kao) आज़ादी से लेकर IB के गठन, 1971 युद्ध, RAW के गठन, इंदिरा गांधी की हत्या जैसी घटनाओं के प्रत्यक्ष गवाह थे. काव के दिमाग और कुशल रणनीति की वजह से ही भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को एक अलग पहचान और कामयाबी मिली. दुनियाभर में भारत के मास्टरस्पाई के नाम से मशहूर RN Kao की दिलचस्प कहानी, सुनिए 'नामी गिरामी' के इस

भारतीय राजनीति का 'किंगमेकर' कॉमरेड जिसने रूस के राष्ट्रपति को सुना दिया: नामी गिरामी, Ep 258
आज कहानी उस नेता की जिसने 44 सालों की अपनी सियासत में लाल परचम को देश की राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखा. आज भी जिसे लोग किंगमेकर के नाम से याद करते हैं. सुरजीत सिर्फ भाषण देने वाले, मार्क्स और लेनिन को कोट करने वाले किताबी कॉमरेड नहीं थे. जमीन की सच्चाई जानते थे. वो बेहद महीन राजनेता थे. उन्हें वीपी सिंह, मुलायम, मायावती से लेकर जयललिता और अमर सिंह तक से बात करने से गुरेज नहीं था. केंद्र में कई स

सरकार से बंदूकें खरीदकर सरकार को ही बेचने वाला इंडस्ट्रियलिस्ट: नामी गिरामी, Ep 257
जे पी मॉर्गन अमेरिका का सबसे प्रभावशाली इंसान थे, उन्होंने देश को पहले भी एक बार आर्थिक संकट से निकाला था, दुनिया का पहली बिलियन डॉलर कंपनी बनाने वाला, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसने अमेरिका को खरीद लिया है और शेयर बाज़ार उसके इशारे पर नाचता था, 'नामी गिरामी' में जे पी मॉर्गन की कहानी सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक्स- कपिल देव सिंह

बीड़ी धौंकने वाला कवि, जिसने नेहरू की मौत पर कहा- 'पार्टनर! अब फासिज्म आ जाएगा': नामी गिरामी, Ep 256
गजानन माधव मुक्तिबोध का नाम कविता की प्रगतिशील धारा और समकालीन विचारधारा के सबसे प्रासंगिक कवियों में क्यों शुमार है, गजानन माधव मुक्तिबोध का व्यक्तित्व और जीवन कैसा रहा, उनके नाम में 'मुक्तिबोध' शब्द जुड़ने की कहानी क्या है, ''पार्टनर! तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?'' ये पंक्ति इतनी मशहूर कैसे हुई, मुक्तिबोध की कविताओं-कहानियों की विशेषता क्या है और हरिशंकर परसाई से लेकर विनोद कुमार शुक्ल के साथ उनके

सबको हराने वाला NTR कैसे पत्नी के प्यार में सब हार गया?: नामी गिरामी, Ep 255
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, तेलुगुदेशम पार्टी के संस्थापक और तेलगु फिल्मों के सुपरस्टार नंदमूरी तारक रामा राव ने राजीव गांधी की लहर में भी अपने क़िले को संभाले रखा, रथ यात्रा पॉलिटिक्स की शुरुआत की और अपनी पत्नी के प्यार में सब लुटा दिया. 300 से ज़्यादा फ़िल्मों में अभिनय, डायरेक्शन, स्क्रीन प्ले करने के बाद NTR ने सात सालों तक आंध्रप्रदेश की सत्ता संभाली, सुनिए NTR की कहानी, जमशेद क़मर सि

जेल जाने, बम बनाने और जीवन की धज्जियां उड़ाने वाले साहित्यकार अज्ञेय की कहानी : नामी गिरामी, Ep 254
अज्ञेय—वो विद्रोही लेखक, जिसने साहित्य और जीवन—दोनों ही में परंपराओं को तोड़ा. हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर रहे अज्ञेय का रचनाकर्म, जीवन के तमाम प्रसंगों और आयामों से समृद्ध है. सुनिए अज्ञेय के जीवन की दिलचस्प कहानी 'नामी गिरामी' में. प्रड्यूसर : अतुल साउंड मिक्स : कपिल

लिंकन को गोली मारने वाले एक्टर ने उसे तानाशाह क्यों कहा?: नामी गिरामी, Ep 253
अब्राहम लिंकन को गुज़रे 150 साल हो चुके हैं, उनके बाद 30 और राष्ट्रपतियों ने देश की कमान, मुश्किल वक़्त में संभाली है. लेकिन आज भी, लिंकन को उनकी लीडरशिप एबिलिटी के लिए याद किया जाता है... मिसालें दी जाती हैं.लिंकन के सम्मान में अमेरिकी करेंसी के एक सेंट और पांच डॉलर पर लिंकन की तस्वीर लगाई गई है... माउंट रशमोर में पहाड़ पर उकेरे गए चार राष्ट्रपतियों के चेहरों में एक चेहरा लिंकन का भी है, ऐसा क्य

मोनालिसा कैसे लियोनार्डो दा विंची से भी ज़्यादा मशहूर हो गई?: नामी गिरामी, Ep 252
मोनालिसा एक पेंटिंग के साथ-साथ कला जगत के लिए एक पहेली भी है. लगभग 500 साल पहले बनाई गई इस पेटिंग को लेकर आज भी कई थ्योरिज़ गढ़ी जाती हैं. मोनालिसा में कितनी बारीकियां छिपी हैं, उसे वही समझ सकता है जो रंगों के इस्तेमाल, बैठने के तरीके, आंखों की रौशनी, पीछे बनी वादियों को अलग-अलग कर परत दर परत अलग कर सके, कैसे एक पेंटिंग उसे बनाने वाले से बड़ी बन गई, सुनिए नामी गिरामी में किस्सा उस कलाकार लियोनार्ड

वो अरबपति कलाकार जो रोम की सड़कों पर फटेहाल घूमता था: नामी गिरामी, Ep 251
मिकल एंजलो ने ऐसी मूर्तियां बनाईं जिसे देख लगता हैं, वो अब बोल उठेंगी, पोप ने पेंटिंग्स बनाने के लिए कहा तो पूरे छत पर न्यूड सब्जेक्ट्स बना दिए और जब मौका मिला वास्तुकला में हाथ आज़माने का तो रोम को सबसे ख़ूबसूरत बिल्डिंग बना कर दिया, हथौड़े की आवज़ा उसके दिल की धड़कनों से मेल खा चुकी थीं, पत्थर टूटने से निकलने वाली धूल उसके नसों में बैठ गई थी, आज 'नामी गिरामी' में सुनिए किस्सा दुनिया के सबसे महान

बलराज साहनी के लिए मुंबई के मज़दूर अस्पताल के बाहर क्यों जमा हो गए थे?: नामी गिरामी, Ep 250
इसे संयोग ही माना जाएगा कि दुनिया जिस तारीख को मज़दूर दिवस मनाती है, उसी तारीख यानी पहली मई 1913 को पंजाब के रावलपिंडी में बलराज साहनी का जन्म हुआ, उनकी फ़िल्मों में किरदार और कहानियां अक्सर आम लोगों के हुआ करते थे, उन्होंने ज़िंदगी में कभी एक्टिंग की ट्रेनिंग नहीं ली थी, उन्होंने ज़िंदगी को ही ऐसे जिया, जैसे कोई स्कूल हो, सुनिए 'नामी गिरामी' में बलराज साहनी की ज़िंदगी से जुड़े किस्से. प्रोड्यूसर-

चुनाव आयोग को अपनी शक्तियां याद दिलाने वाले जामवंत थे टी एन शेषन: नामी गिरामी, Ep 249
तिरुनेलै नारायण अइयर शेषन इन शॉर्ट टी एन शेषन, 12 दिसंबर, 1990 को भारत के 10वें चुनाव आयुक्त बने थे. इनके बाद 15 लोग और इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं, लेकिन शेषन ने अपने कार्यकाल में जो किया उसकी वजह से चुनाव आयोग के इतिहास को बिफ़ोर शेषन और आफ़्टर शेषन के तौर पर याद किया जाता है, बतौर चुनाव आयुक्त शेषन ने क्या बदलाव किए, सुनिए 'नामी गिरामी' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक

फ़िल्मों का ग्रामर गढ़ने वाले बस्टर कीटन क्यों भुला दिए गए?: नामी गिरामी, Ep 248
बस्टर कीटन का जन्म स्टेज पर हुआ, ये कहना ज़्यादा ग़लत नहीं होगा. जब वो तीन साल के थे तब से ही वो अपने मां-बाप के साथ स्टेज पर दिखने लगे थे. जब ठीक से बोलना चलना सीख लिया तो पिता के प्ले में किरदार भी निभाने लगे. चार्ली चैप्लिन के समकालिन बस्टर कीटन ने फ़िल्म बनाने का तरीका सिखाया, अपने स्टंट से सबको हंसाया लेकिन क्यों उन्हें आज चैप्लिन की तरह याद नहीं किया जाता, कैसे प्रोडक्शन हाउस ने उनके करियर

'अश्लील’ गाने गा कर भी चमकीला रिकॉर्ड कैसे तोड़ रहा था?: नामी गिरामी, Ep 247
चमकीला जब स्टेज पर चढ़ता तब उसके रुआब को देखकर लोगों ने उसे पंजाब का एल्विस प्रेस्ली कहना शुरू कर दिया था. स्टेज पर जितना उसका अंदाज़ हिट था, मार्केट में उसके कैसेट सुपरहिट थे. एक तरफ उसके ऊपर अश्लील गीत लिखने और गाने के आरोप लगते थे, दूसरी ओर उसके रिकॉर्डिंग्स हाथों-हाथ बिक जाते थे, अमरजीत सिंह चमकीला की पूरी कहानी, सुनिए 'नामी गिरामी' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. प्रोड्यूसर- कुंदन साउंड मिक्स-

फ़ोर्ड, जिसे हिटलर से मेडल मिला और गांधी से चरखा: नामी गिरामी, Ep 246
जिस फ़ोर्ड कार कंपनी को हम आज जानते हैं, उसे बनाने से पहले हेनरी फ़ोर्ड ने तीन कार कंपनियां बनाईं. फोर्ड अमेरिका के हीरो थे. युद्ध विरोधी होने के बावजूद पहले और दूसरे विश्वयुद्ध में उन्होंने सेना की मदद में अपनी फ़ैक्ट्रियां खोल दीं. फोर्ड की तारीफ उस जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर तक ने की जो अमेरिका को दुश्मन मानता था और फ़ोर्ड ख़ुद महात्मा गांधी का फैन था, कार बनाने की दुनिया में क्रांति लाने वाले

बॉलर बनने की चाहत रखने वाला मुख्तार अंसारी बाहुबली कैसे बना?: नामी गिरामी, Ep 246
मुख़्तार अंसारी की कहानी कभी भी मुख़्तार अंसारी से नहीं शुरू की जा सकती, इसे संपूर्णता में समझने के लिए भारत की आज़ादी से पहले तक जाना होगा. अंसारी परिवार को ग़ाज़ीपुर का 'प्रथम राजनीतिक परिवार भी कहा जाता है. परिवार का रसूख़ पूरे गाज़ीपुर में था, मुख़्तार अंसारी ने इसकी चौहदी को और बढ़ाया, मुख़्तार अंसारी और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव ग़ाज़ीपुर से लेकर मऊ, जौनपुर, बलिया और बनारस तक गया. कैसे

कहानी बांग्लादेश में कत्लेआम कराने वाले पाकिस्तानी तानाशाह की: नामी गिरामी, Ep 245
1971 भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. पूर्वी पाकिस्तान आज़ाद हो गया और बांग्लादेश के रूप में एक नया देश बना. लेकिन इस युद्ध के दौरान पाकिस्तान आर्मी चीफ़ और राष्ट्रपति याहया खान पार्टी कर रहे थे. अपनी रंगीन-मिज़ाजी के लिए मशहूर याहया खान किन परिस्थितियों में वो पाकिस्तान के सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे? बांग्लादेश में कत्लेआम करवाने वाले इस तानाशाह के ज़िंदगी से जुड़े सभी

फिरोज़ गांधी और कमला नेहरू के पोस्टर इलाहाबाद में क्यों चिपकाए गए थे?: नामी गिरामी, Ep 244
फिरोज़ गांधी जो कमला नेहरु के कहने पर कॉलेज की पढ़ाई छोड़ स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और बाद में उनके दामाद भी बने और जब वो सासंद गए तो अपने ससुर और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से तीखे सवाल पूछें और जब कांग्रेस ने केरल की राज्य सरकार को गिराया तो अपनी पत्नी इंदिरा को भी फ़ासिस्ट कहने से नहीं चूके, ‘नामी गिरामी’ में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से सुनिए उस गांधी की कहानी जिसे इतिहास और राजनीति में भुला

बिशन सिंह बेदी जिसने एक सच बोल कर करोड़ों रुपये गंवा दिए: नामी गिरामी, Ep 243
बिशन सिंह बेदी जब भी मैदान पर होते थे, उनकी पहचान क्रिकेट के आदर्श छात्र के रूप में होती थी. खेल के प्रति उनकी श्रद्धा अटूट थी, लेकिन वे अपने हक़ के लिए लड़ना भी जानते थे. जैसे लोग अमिताभ बच्चन को फ़िल्मों के 'एंग्री यंग मैन' के रूप में जानते थे, वैसे ही बेदी को क्रिकेट का 'एंग्री यंग मैन' कहा जाता था. 'सरदार ऑफ़ स्पिन' की ज़िंदगी के तमाम रंग जानने के लिए सुनिए 'नामी गिरामी' जमशेद क़मर सिद्दीकी के

51 रुपये क्यों पंकज उधास को ज़िंदगी की सबसे बड़ी कमाई लगती थी?: नामी गिरामी, Ep 242
मशहूर एक्टर राजकपूर एक बार काम के सिलसले में कहीं जा रहे थे, फ्लाइट के भीतर सीट पर बैठे-बैठे, टैक ऑफ़ होने के इंतज़ार में थे, तभी उन्हें अपनी सीट के पास से एक इंसान को गुज़रता देखा, राज कपूर साहब उसे जानते थे, उन्होंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, पंकज तुम अमर हो गए.. जी हां वो इंसान गायक पंकज उधास थे, गर्वित श्रीवास्तव से 'नामी गिरामी' में सुनिए उधास ज़िंदगी के ख़ास लम्हों की कहानी. प्रोड्यूस- कुंद

अमीन सायानी सरकार की एक ग़लती से मशहूर हुए थे?: नामी गिरामी, Ep 241
अमीन सायानी की आवाज़ को अपनी पहचान कैसे मिली, कैसे उन्होंने दशकों तक सुनने वालों के दिलों पर राज किया और ख़ुद रेडियो की पहचान बन गए, अमीन सायानी ने अपने पूरी जीवन में तकरीबन 54 हज़ार रेडियो प्रोग्राम्स को अपनी आवाज़ दी लगभग 19 हज़ार जिंगल्स भी उनके हिस्से आए. यहां तक कि बतौर रेडियो प्रेजेंटर वो कुछ फ़िल्मों में भी दिखे लेकिन कैसे सरकार के एक फ़ैसले ने उनकी ज़िंदगी बदल कर रख दी, सुनिए 'नामी गिरामी'

हकीम अजमल खान को कैसे मिल गई हिंदू महासभा की अध्यक्षता?: नामी गिरामी, Ep 240
कब्रों पर घास बहुत आम बात होती है. लेकिन जब आम आदमी की हो. ऐसे आदमी की कब्र की अनदेखी आप बर्दाश्त करेंगे जो स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा था? आज कहानी सुनिए हकीम अज़मल खान की जिनकी कब्र पर घास है लेकिन उनकी उपलब्धियों पर कोई टीका तक नहीं कर सकता 'नामी गिरामी' के इस एपिसोड में. प्रोड्यूसर: रोहित अनिल त्रिपाठी साउंड मिक्स: सचिन द्विवेदी

50 रुपये कम सैलरी लेने वाला डायरेक्टर जो अमिताभ को फ़िल्मों में लाया: नामी गिरामी, Ep 239
ख़्वाजा अहमद अब्बास के बारे में अगर ये कहा जाए कि उन्होंने अपने पेशे से एक सेकेंडे के लिए भी बेइमानी नहीं की तो इसमें कुछ भी ग़लत नहीं होगा. उन्होंने जैसे लोग देखे वैसी कहानियां लिखी, जैसी कहानियां लिखी वैसी फ़िल्में बनाईं और बतौर मूवी क्रिटिक जैसी फ़िल्में देखी बिना किसी के प्रभाव में आए उसकी वैसी आलोचना लिखी, सुनिए 'नामी गिरामी' के इस एपिसोड में कहानी ख़्वाजा अहमद अब्बास के जीवन की. प्रड्यूस- कु

खुशवंत सिंह ने नरगिस से क्यों कहा कि मैं लोगों से कहूँगा आप मेरे साथ सोई हैं?: नामी गिरामी, Ep 238
हिन्दी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री हुई हैं नरगिस. कई इंटरव्यूज में उन्होंने एक वाकये का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि उनके बेटे और ऐक्टर संजय दत्त उस वक्त हिमाचल प्रदेश के कसौली में लौरेंस स्कूल में पढ़ते थे. सुनील दत्त की अपनी व्यस्तता थी इसलिए उन्होंने अकेले जाने का निर्णय लिया. उस वक्त के एक मशहूर लेखक और पत्रकार वहीं रहते थे. नरगिस ने उनसे कहा कि क्या वो एक दिन के लिए उनके घर में रह सकती हैं. उ

अशोक सिंघल को अटल बिहारी बाजपेई सरकार के खिलाफ अनशन क्यों करना पड़ा था?: नामी गिरामी, Ep 237
विज्ञान पढ़ने वाला एक इंजीनियर लड़का कैसे बना राम मंदिर आंदोलन का मुख्य चेहरा, आरएसएस से विश्व हिन्दू परिषद तक का सफर तय करने वाले अशोक सिंघल का राम मंदिर बनवाने में क्या योगदान था, बाबरी विध्वंस के कितने जिम्मेदार थे सिंघल और अपने अंतिम दो दशकों में उनकी भारतीय जनता पार्टी से क्यों नहीं बन पाई? सुनिए ‘नामी गिरामी’ के इस एपिसोड में. साउंड मिक्स – सचिन द्विवेदी प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी

उस्ताद राशिद खान को संगीत की ट्रेनिंग से डर क्यों लगता था?: नामी गिरामी, Ep 236
1968 की जुलाई में एक लड़का रामपुर-सहसवान गायकी घराने में जन्मा था. ये गायकी ग्वालियर घराने के काफी क़रीब मानी जाती है. चाचा दादा और यहां तक उसके नाना भी शास्त्रीय संगीत के उस्ताद लोग थे. लेकिन उस लड़के को गायकी पसन्द नहीं थी. रियाज़ उसे चिढ़ाता था. सात साल की उम्र में उसने अपनी मां को खो दिया. इस घटना ने उसके जीवन को ऐसा बदला कि संगीत के प्रति उस बच्चे की चिढ़ ना जाने कहां चली गई. चाचा के साथ मुम्बई आ ग

मुनव्वर राना को अपनी ख़रीदी गाड़ी से क्यों नफ़रत हो गई थी?: नामी गिरामी, Ep 235
एक शायर था. दुनिया उसे मां पर कहे शेरों से जानती थी. मुहाजिर उसके मुहाजिरनामा के शेर पढ़ कर खुश होते थे. सरकारें उसे इनाम देती थीं. विवाद से उसका नाता भी था. लेकिन आज के 8 बरस पहले उसने तय किया कि वो कोई सरकारी सम्मान या पुरस्कार नहीं लेगा.और ताज़िन्दगी उसने इसे फॉलो भी किया क्योंकि उसे लगता था कि हुकूमत और ये समाज कमज़ोरों के साथ ज्यादती कर रहे हैं. उर्दू का ये शायर हिंदी के काशीनाथ सिंह के साथ कं

जमनालाल बजाज से अंग्रेजों ने क्यों मांगी थी मदद?: नामी गिरामी, Ep 234
4 नवंबर 1889. सीकर के एक गांव काशी का बास में एक लड़का जन्मा था. बहुत ग़रीब परिवार था.लेकिन वो लड़का ग़रीबी में ही मर जाने को ही नहीं पैदा हुआ था.किस्मत उसके साथ थी. उसे एक बड़े कारोबारी सेठ बच्छराज ने गोद ले लिया. 1906 में उसने कारोबार सम्हाला. और तरक्की की वो सीढियां चढ़ीं कि आज उसकी कम्पनी ग़रीबों की मदद करने के बाद भी कॉरपोरेट दुनिया की उस ऊंचाई पर है जहां पर कोई भी कम्पनी पहुंचना चाहती होगी. या कई त

प्रेमचंद की किताब अंग्रेजों ने क्यों जला दी थी?: नामी गिरामी, Ep 233
हरिशंकर परसाई का एक लेख है. लेख क्या है तस्वीर है. एक लेखक के फ़टे जूतों के बारे में. लिखते हैं कि उसने कुरीतियों को इतनी बार जूते मारे की वो फट गए. उसने बेईमानी नहीं की इसलिए नए जूते भी नहीं ख़रीद सका. इस लेखक का नाम है: प्रेमचंद, नमक का दारोगा से लेकर निर्मला और गोदान जैसी उपन्यासों के लेखक मुंशी प्रेमचंद. सुनिए उनकी कहानी इस एपिसोड में. प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी साउंड मिक्स – सचिन द्विवे

अमृता की मोहब्बत ने इमरोज़ को कैसे बदला?: नामी गिरामी, Ep 232
मशहूर लेखिका और शायर अमृता प्रीतम की एक किताब छपनी थी. उन्होंने एक आर्टिस्ट जिसका नाम सेठी था, अपनी किताब 'आख़िरी ख़त' का कवर डिज़ाइन करने को कहा. सेठी ने कहा कि वो एक ऐसे बंदे को जानते हैं जो ये काम उनसे बेहतर कर सकता है. अमृता ने कहा ठीक है उसे बुलाओ.सेठी के कहने पर अमृता ने उस शख्स को बुलवाया. शुरुआत में उस आर्टिस्ट ने साफ मना कर दिया. लेकिन अमृता ने रिक्वेस्ट कर उन्हें मनाया और फिर किताब आख़िरी

प्रधानमंत्री ना बन पाने की कौन सी 3 वजहें गिनाते थे प्रणब मुखर्जी?: नामी गिरामी, Ep 231
एक नेता था, जो सियासी हलकों में बहुत योग्य कहा जाता था. जिसके पास प्रधानमंत्री बनने के भी बहुत मौके आए, पर किस्मत ने उसका साथ कभी नहीं दिया. मंत्रालयों से काम चलाता रहा. लेकिन एक दिन देश का राष्ट्रपति बना. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो उनकी पार्टी के नहीं थे फिर भी उनके प्रति सम्मान ज़ाहिर करते रहे. इस नेता का नाम है प्रणब मुखर्जी. देश के पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न प्रणब मुखर्जी. सुनिए प्र

जूनियर महमूद सुपरस्टार होने के बावजूद छोटे किरदार क्यों निभाते रहे?: नामी गिरामी, Ep 230
नईम सय्यद कैसे बने जूनियर महमूद, 265 फिल्मों में ऐक्टिंग और दर्जनों मराठी फिल्मों में डायरेक्शन और प्रोडक्शन के बावजूद उनका करियर कहाँ अधूरा रह गया, राजेश खन्ना से उनकी क्या शिकायत रही और महमूद उनसे कैसे प्रभावित हुए कि अपना नाम तक दे दिया? सुनिए जूनियर महमूद की पूरी कहानी ‘नामी गिरामी’ के इस एपिसोड में. प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी साउंड मिक्स – कपिल देव सिंह

एक छतरी के कारण कैसे पकड़ा गया सीरियल किलर रमन राघव! :नामी गिरामी, Ep 229
60 का वो दशक जब बंबई में गरीब, भिखारी, झुग्गियों में रहने वाले, फुटपाथ पर सोने वाले लोग एक-एक कर मारे जा रहे थे. कभी-भी, कहीं भी, कोई भी मार दिया जाता था. मरने वालों के बीच कहीं कोई संबंध नहीं होता था. सिर्फ दो बातों को छोड़कर- पहला, उन्हें मारने का वीभत्स तरीका और दूसरा, खुद मारने वाला. इन्हें मौत की नींद सुलाने वाले का नाम था रमन राघव. जिसे भारत का पहला सीरियल किलर कहा जाता है. इस बार के 'नामी गि

निर्मला नागपाल से डांस क्वीन कैसे बनी सरोज खान?: नामी गिरामी, Ep 228
फिल्म इंडस्ट्री की मास्टरजी कही जाने वाली सरोज खान ने कई अभिनेत्रियां चाहे वो साधना हो, माधुरी हो, श्रीदेवी हो या ऐश्वर्या सबको डांस की कला में पारंगत बनाया है. लेकिन उनके बेस्ट कोरियोग्राफर बनने का सफर कहां से शुरू होता है, क्यों सरोज खान अपने जैसी एक ही थीं? सुनिए 'नामी गिरामी' में नितिन ठाकुर के साथ. प्रड्यूसर: ख़ुशबू कुमार साउंड मिक्सिंग: कपिल देव सिंह

सुब्रत रॉय के सहाराश्री से बैड ब्वॉय बिलियनर बनने की कहानी में कई मोड़ हैं: नामी गिरामी, Ep 226
सुब्रत रॉय जिनको उनके चाहने वालों ने सहारा श्री कहा और आलोचकों ने जालसाज. उनकी कहानी कई मायनों में रहस्यों से भरी है. कैसे वो व्यक्ति चंद सालों में अरबों की कंपनी का मालिक बन जाता है, जिसको लोग सर-आंखों पर बिठाए रखते थे, जिनकी राजनीति से लेकर सिनेमा जगत में तूती बोलती थी, वह अर्श से फर्श पर क्यों गिरा और उनकी सहारा समूह की चमक क्यों फीकी पड़ने लगी थी? सुनिए 'नामी गिरामी' के इस एपिसोड में. रिसर्च,

पाकिस्तान बनवा कर उसके भी दो टुकड़े करने वाला नेता: नामी गिरामी, Ep 225
भारत पाकिस्तान के इतिहास में बांग्लादेश का उदय कितनी बड़ी घटना है, ये शायद बताने की भी जरूरत नहीं. इस उदय में उतनी ही बड़ी घटना मुजीब उर् रहमान का होना भी है,जिन्होंने बांग्लादेश को अलग मुल्क बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. ‘नामी गिरामी’ के इस एपिसोड में सुनिए उनकी कहानी. साउंड मिक्स – नितिन रावत प्रोड्यूसर – रोहित अनिल त्रिपाठी

जब एक मुख्यमंत्री ने विजयाराजे सिंधिया की फाइल पर लिखा 'ऐसी तैसी': नामी गिरामी, Ep 224
ये कहानी है साठ के दशक की. जगह है मध्यप्रदेश का भोपाल. मुख्यमंत्री आवास के बाहर कुछ छात्रों का मजमा लगा था. सरकार से उनकी कुछ मांगें थीं. छात्रों के साथ एक महिला भी आई थी. सबको लग रहा था कि मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र आसानी से इस महिला की बात सुन लेंगे और वो खुशी खुशी लौट जाएंगे. लेकिन होना कुछ और था. मुख्यमंत्री आवास के अंदर पर्ची गई. उस पर लिखा था - ‘राजमाता आई हैं’. लेकिन मुख्यमंत्री शायद

मीरा के भजन गाने वाली नय्यारा नूर कैसे बनी पाक़िस्तान की बुलबुल?: नामी गिरामी, Ep 224
विरह की रूहानी आवाज़ जिसे गाने का नहीं बल्कि सुनने का शौक़ था, भारत में जन्मी और पाकिस्तान का होकर रह गईं नय्यारा नूर क्यों एक ख़ालिस फ़नकार थीं, फ़ैज़ की शायरी को आवाज़ देने वाली नय्यारा ने क्यों हमेशा संजीदा कलाम ही गाया, सुनिए 'नामी गिरामी' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. रिसर्च, स्क्रिप्ट & प्रोडक्शन ~ शुभम तिवारी साउंड मिक्सिंग ~ नितिन रावत

भैरो सिंह शेखावत: ऊंट की सवारी करने वाला राजस्थानी शेर: नामी गिरामी, Ep 223
ऊंट की सवारी और वीर रस की कविता से शुरुआती दिनों में जनता को लुभाने वाले भैरो सिंह शेखावत कैसे बन गए राजस्थान के इकलौते शेर, शेखावत क्यों बार-बार अपना चुनावी क्षेत्र बदल लेते थे, अपनी बिरादरी के ख़िलाफ़ भी खुलकर बोलने वाले बाबोसा का सफ़रनामा 'नामी गिरामी' में सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
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