
Puliyabaazi Hindi Podcast पुलियाबाज़ी हिन्दी पॉडकास्ट
A Hindi podcast that features in-depth conversations on politics, public policy, technology, philosophy, and other interesting topics. Hosted by tech entrepreneur Saurabh Chandra, public policy researcher Pranay Kotasthane, and writer-cartoonist Khyati Pathak, the show brings expert guests for casual yet thoughtful discussions. The title and intro describe late-night chats on a bridge (pulia) solving complex world problems in everyday language.
Episodes

सरकार क्या है: गब्बर या रॉबिनहुड? Myths in Public Finance and India's Economy ft. Sarthak Pradhan
इस एपिसोड में हम प्रणय कोटस्थाने और सार्थक प्रधान के साथ पब्लिक फाइनेंस और भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मिथकों पर चर्चा करते हैं। सरकार किस पर सबसे ज़्यादा पैसा खर्च करती है? Interest rates कब बहुत ज़्यादा माने जाते हैं? और सरकारों के लिए कर्ज़ लेना कब सही होता है? इन सब महत्वपूर्ण और दिलचस्प सवालों पर आज की पुलियाबाज़ी।We discuss:* Sarkaar Kya Hai? Gabbar ya Robinhood?* Myths in Public Finance

डेरी में नंबर वन, पर 'वे' एक्सपोर्ट में पीछे क्यों? | India’s Missing Food Exports
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश माना जाता है, पर जब बात ‘वे’ (Whey) प्रोटीन निर्यात करने की आती है, तो हम पीछे क्यों रह जाते हैं? इस एपिसोड में हम भारतीय डेरी उद्योग की ज़मीनी हक़ीकत को खंगालते हैं। ख़राब उत्पादकता (productivity), प्राइवेट कंपनियों के लिए चुनौतियाँ, और सरकार द्वारा लगाए गए 40% इम्पोर्ट ड्यूटी जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। साथ ही यह समझने की कोशिश करते हैं कि जब बाज़ार मे

भारतीय महिलाओं की श्रमबल में हिस्सेदारी इतनी कम क्यों? What is keeping Indian Women out of the Workforce?
आज पुलियाबाज़ी पर एक नया फॉर्मेट आज़माने की कोशिश की है। सौरभ ने इसे नाम दिया है जुगनी। जुगनी की तरह मन मुताबिक हम किसी एक विषय को टटोलेंगे। चर्चा के बदले किसी एक विषय की क्लास लगेगी। प्रणय ने इसे नाम दिया है पुलियाबाज़ी प्रवचन। श्रोता लोग भी कुछ नाम सुझा सकते हैं। पसंद आएगा तो लॉक कर देंगे। ये नया फॉर्मेट आप को पसंद आया की नहीं ये भी बताइये। भविष्य में चर्चा तो जारी रहेगी ही, बीच बीच में कुछ क्लास

डिजिटल पेमेंट का गणित | Should UPI be free?
भारत में डिजिटल पेमेंट्स की क्रांति लाने वाले UPI पर सरकार अब कुछ शुल्क लगाना चाहती है। कई लोगों का मानना है कि ये एक “पब्लिक गुड” है जिसका खर्चा सरकार को ही उठाना चाहिए। आज पुलियाबाज़ी पर हम चर्चा करेंगे कि इसे लोकनीति के दृष्टिकोण से कैसे समझें? क्या डिजिटल पेमेंट्स नेटवर्क को सिर्फ सरकार के भरोसे छोड़ना सही है या फिर इसमें प्राइवेट कॉम्पिटिशन की जरूरत है? क्या UPI वाकई एक Public Good है? इन्हीं स

भारतीय उदारवाद: राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक आज़ादी की ओर। The Dilemma of an Indian Liberal ft. Gurcharan Das
उदारवाद को लेकर हमारे देश में कई तरह की ग़लतफ़हमियाँ देखने को मिलती हैं। क्या यह केवल एक पश्चिमी सोच है, या हमारे अपने इतिहास, भक्ति आंदोलन और ‘धर्म’ की जड़ों में भी इसकी गहरी झलक मिलती है? आज की पुलियाबाज़ी में प्रसिद्ध लेखक और चिंतक गुरचरण दास जी के साथ हम इसी विषय पर बारीकी से चर्चा करेंगे।गुरचरण दास जी ने भारत की आज़ादी से लेकर अब तक का सफर करीब से देखा है। उनके जीवन से किस्से, कहानियाँ और फलसफ

सफ़रनामा: ब्रिस्बेन, लंडन, केंटकी। Australian Outdoors, London Museums, GE in Kentucky
दुनिया की सैर केवल नई जगहों को देखने का नाम नहीं है, बल्कि नए विचारों, शहरों के डिज़ाइन और पब्लिक लाइफ को समझने का एक अनूठा ज़रिया भी है। आज की पुलियाबाज़ी में हम लेकर आए हैं एक और सफरनामा। प्रणय, सौरभ और ख्याति के हालिया सफ़र और अनुभवों के ज़रिये हम चर्चा करेंगे कि कैसे बेहतर डिज़ाइन के ज़रिये रस्ते सुरक्षित और शहर सुंदर बन सकते है। साथ ही हम टटोलेंगे कुछ सवाल जैसे कि अच्छे म्यूजियम बनाना किसकी जिम

तेज़ विकास, लेकिन घटती उत्पादकता। India’s Productivity Problem ft. Amit Basole
भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। लेकिन अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेज़ी से बढ़ रही है, तो रोजगार को लेकर चिंता क्यों बनी हुई है? क्या भारत में सचमुच “जॉबलेस ग्रोथ” हो रही है, या कहानी इससे कहीं ज़्यादा दिलचस्प है?इस पुलियाबाज़ी में हमारे साथ हैं अर्थशास्त्री प्रो. अमित बसोले। हम बात करते हैं लेबर प्रोडक्टिविटी यानी श्रम उत्पादकता की। यह क्या होती है? क्या प्रोडक्टिविटी बढ

जनगणना से उभरती भारत के एकीकरण की कहानी। Census & the Making of Modern India ft. Shivakumar Jolad
आज की पुलियाबाज़ी में हम चर्चा कर रहे हैं भारत की जनगणना और प्रशासनिक ढाँचे के इतिहास और उसके महत्व पर। 19वीं सदी की Life Expectancy से लेकर ज़िलों के विकास की दास्तान और महाराजाओं की महात्वाकांक्षाओं पर लगाम कसने तक, यह एपिसोड जनगणना के आंकड़ों से आधुनिक भारत के निर्माण की एक अनोखी कहानी पेश करता है। जानिए कि कैसे Census के सवाल वक्त के साथ बदलते गए और कैसे यह डेटा हमारे समाज और नीतियों को आकार दे

पानी से पेट्रोल, Wiki में भी मार्केट, और AI संप्रभुता की बहस। E20 Petrol, Markets in Wiki, AI Sovereignty
क्या E20 पेट्रोल यानी 20% इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल सचमुच भारत के हित में है, या हम अनजाने में अपनी पानी और खाद्य सुरक्षा दांव पर लगा रहे हैं? क्या आम जनता को अपनी गाड़ियों के लिए फ्यूल चुनने का ऑप्शन मिलना चाहिए? इसके साथ ही, एपिसोड में कुछ दिलचस्प TIL फैक्ट्स और टेक्नोलॉजी की दुनिया के हॉट टॉपिक ‘AI Sovereignty’ यानी डिजिटल संप्रभुता पर भी एक मज़ेदार चर्चा शामिल है।We discuss:* Issues with E20* People

चुनाव, पैसा और हमारा लोकतंत्र: The Cost of Politics in India ft. Niranjan Sahoo, Ambar Kumar Ghosh
आज की पुलियाबाज़ी में हम बात कर रहे हैं राजनीति और पैसे के उस गहरे गठजोड़ की, जो हमारे लोकतंत्र पर सीधा असर डालता है। आखिर हमारे राजनेताओं को चुनावों में इतना पैसा कहाँ और क्यों ख़र्च करना पड़ता है? क्या वोट ख़रीदने की प्रथा और वोटरों की बढ़ती बेरुखी हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों के चेहरे बदल रही है? इस चर्चा में हम टटोलेंगे कि चुनावी चंदे के इस खेल में इतनी असमानता क्यों है, क्या 'वन नेशन वन इलेक्श

एक देश, एक परीक्षा और अंतहीन दबाव: क्या वाकई कोई और रास्ता नहीं है? One Nation, One Exam, One Deep Crisis
क्या ‘एक देश, एक परीक्षा’ का फॉर्मूला हमारे स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ा जाल बन चुका है? जब नीट (NEET) जैसी एक इकलौती परीक्षा लाखों बच्चों का भविष्य तय करने लगती है, तो स्टूडेंट्स पर तनाव का पहाड़ टूटना लाज़मी है। आज की पुलियाबाज़ी में हम इसी गंभीर मुद्दे की तह तक जाएंगे। हम चर्चा करेंगे कि क्या हमारी परीक्षाएं विद्यार्थियों की काबिलियत परख रही हैं या सिर्फ एक छटाई का साधन बनकर रह गई हैं? दुनिया भर के कॉ

चीन के युद्धों से भारत के लिए सबक। How Does China Fight Its Wars ft. Vijay Gokhale, Former Foreign Secretary of India
आज की मल्टीपोलर दुनिया में भारत के लिए चीन और उसकी रणनीति को समझना बेहद ज़रूरी हो गया है। पिछले कुछ सालों में सीमा पर झड़पें हों या 1962 के युद्ध की कड़वी यादें, भारत की तरफ चीन का रवैया अक्सर एक पहेली समान लगता है। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए आज की इस पुलियाबाज़ी में हमारे साथ जुड़ते हैं भारत के पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले जी। चीन का ग्रेज़ोन वारफेयर हो या कूटनीतिक दाव-पेच, चीन युद्ध कैसे करता है इस

क्या चीन के साथ दोस्ती मुमकिन है? India-China Relations: Cordial or Volatile?
क्या भारत और चीन के बीच कभी सच में दोस्ती हो सकती है? आज की पुलियाबाज़ी में हम इसी सवाल की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं। बीजिंग में बैठे पॉलिसी मेकर्स भारत को किस नज़रिये से देखते हैं और उनका ‘Western Theatre Command’ भारत के लिए कितना बड़ा सिरदर्द है? अरुणाचल प्रदेश पर चीन के लगातार दावों से लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों के नफ़े-नुक़सान तक, आज की चर्चा में इन सभी गंभीर मुद्दों पर वि

अनदेखा ढाँचा: Engineering Talent, Non-Profit Trade Bodies, Vibrant Public Libraries
यह चर्चा पिछले एपिसोड से चल रही चर्चा का दूसरा भाग है। पिछले हफ्ते हमने बात की थी AI और डिजिटल दुनिया के बारे में। इस हफ्ते हम अपनी नज़र दौड़ाते है उस अदृश्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर जिसकी कमी की वजह से भारत कई मायनों में पीछे छूट जाता है। हम टटोलेंगे अमेरिका के ‘ट्रेड शोज़’ का गणित, समझेंगे हवाई जहाज़ के ईंधन पर लगने वाले टैक्स को, और आख़िर में बात होगी कि कैसे एक सार्वजनिक पुस्तकालय अपनी अनोखी कोशिशों से

सोच की स्वछंदता, सॉफ्टवेयर का 'कबाड़ा' और AI की दौड़ में भारत कहाँ? Cognitive Autonomy, Enshittification and AI Divide
पुलियाबाज़ी के इस एपिसोड में, हम चर्चा करते हैं AI क्रांति और उभरते हुए “AI Divide” पर। क्या भारत AI के इस्तेमाल से अपनी विशाल मानव पूंजी (human capital) के लिए अवसर पैदा कर पायेगा? क्या AI क्रांति भारत की समस्याओं को सुलझाने में काम आएगी? इसके अलावा, हम AI के दौर में अपनी सोचने-समझने की आज़ादी (cognitive autonomy) कैसे बचा कर रखे? साथ ही, बातचीत सॉफ्टवेयर के “enshittification” ट्रेंड पर।We disc

संसद का रिपोर्ट कार्ड। Legislative Incentives of Our Parliamentarians ft. Prof. Ajit Phadnis
अक्सर हम चुनावों के शोर में यह भूल जाते हैं कि हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों का असली काम क्या है। चुनावों पर तो सबकी नज़र रहती है, लेकिन चुने जाने के बाद हमारे प्रतिनिधि संसद में क्या करते हैं इस पर हमारा ध्यान कम ही रहता है। तो आइए, आज प्रोफ़ेसर अजित फडनिस के साथ पुलियाबाज़ी पर समझते हैं कि हमारे जनप्रतिनिधि किन प्रोत्साहनों और पाबंदियों में रहकर अपना काम करते हैं। किन धाराओं के तहत वे जनता की बात संस

क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति सिर्फ ताक़त का खेल है? Geopolitics, Diplomacy and IR Framework with Prof. Atul Mishra
क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति सिर्फ ‘स्ट्रांगमेन’ यानी ताक़तवर नेताओं के अहंकार से चलती है, या इसके पीछे कोई गहरी प्रक्रिया काम करती है? दुनिया की व्यवस्था पर आज जो प्रहार हो रहा है, इसका दुनिया और भारत पर क्या असर पड़ेगा? आज की पुलियाबाज़ी में हमारे साथ हैं आईआर (IR) एक्सपर्ट प्रोफेसर अतुल मिश्रा, जिनके साथ हम इन पेचीदा सवालों के जवाब तलाशेंगे। तो आप भी इयरफोन्स लगाकर बैठ जाएं आज की इस IR मास्टरक्लास

संसद में आख़िर हुआ क्या? संवैधानिक संशोधन की गुत्थी। Parliament, Delimitation & Women's Reservation ft. M. R. Madhavan
पिछले हफ़्ते हमारी संसद में एक ख़ास सत्र बुलाया गया था। इस सत्र के बाद जो रिपोर्टिंग हुई उसके चलते लोग और भी कन्फ्यूज़ हो गए। तो हमें लगा कि हमें भी पुलियाबाज़ी का एक अर्जेंट सत्र बुलाना चाहिए ताकि संवैधानिक संशोधनों की इस गुत्थी को सुलझाया जाए। इस चर्चा पर हमारे मेहमान है PRS Legislative के एम. आर. माधवन जी जो हमारे विधायकों को भी सलाह देते हैं। आज की चर्चा में पेश है हमारी संसद के बदलते स्वरुप और उस

क्योंकि SaaS भी कभी Moat थी। Will AI Eat the Software Industry? Ft. Sidu Ponnappa
आज की पुलियाबाज़ी में हम एक बहुत ही दिलचस्प और ज़रूरी मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। क्या AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के आने से सॉफ्टवेयर और सर्विस की दुनिया पूरी तरह बदल गई है? भारतीय IT Services का भविष्य क्या होगा और इस बदलती दुनिया में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की भूमिका कैसी होगी? इन सभी ज्वलंत मुद्दों पर बात करने के लिए आज हमारे मेहमान हैं सिदु पोनप्पा जो RealFast AI के कोफाउंडर और CEO है।We discus

भारत में ऊर्जा क्रांति के लिए एक दूरदर्शी सोच। A Vision for Clean Energy in India ft. Ajay Shah
दुनिया एक बड़े ऊर्जा परिवर्तन के मुहाने पर खड़ी है, जहाँ तेल और कोयले जैसे ईंधन के सामने सौर और पवन ऊर्जा के विकल्प अब मौजूद हैं। इसके बावजूद वे भारत की ऊर्जा खपत का केवल 3.2% हिस्सा है। ऐसा क्यों है? क्या इसमें हमारी नीतियाँ आड़े आ रही हैं? इस एपिसोड में चर्चा है भविष्य के ऐसे विज़न की जिसमें भारत स्मार्ट इलेक्ट्रिफिकेशन से सही मायने में साफ़ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ सकता है। चर्चा के लिए हमारे मेहमा

परमाणु युद्ध के खतरे को कैसे घटायें? Nuclear Deterrence Strategy ft. Dr. Manpreet Sethi
इस हफ़्ते युद्ध की खबरों और अटकलों के चलते सभी अपने अपने फ़ोन पे डूम-स्क्रॉलिंग में लगे हैं। कुछ काम, कुछ तबियत, और कुछ प्रवास के बीच, हमें पुलिया पर मिलने का मौका नहीं मिला। लेकिन पुलियाबाज़ी की ख़ास बात ये है कि अक्सर कुछ नई घटना घटती है और हमें कोई पुरानी पुलियाबाज़ी की याद दिला देती है। ऐसे ही कुछ युद्ध के शंखनाद के बीच शांति की गुहार लगाती हुई ये चर्चा हमें याद आ गयी। परमाणु शक्ति धारक देश जब युद्

जंग के मैदान का नया इक्का? Are Drones Rewriting the Rules of Warfare? ft. Anushka Saxena
क्या वाकई ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में ड्रोन्स सबसे बड़ा मोहरा साबित हो रहे हैं? क्या ड्रोन्स के आने से युद्ध के एक नए युग का उदय हुआ है? इस विषय पर पुलियाबाज़ी के लिए हमारे साथ जुड़ रही है हमारी मेहमान अनुष्का सक्सेना। वे तक्षशिला इंस्टीटूशन के इंडो-पैसिफिक स्टडीज़ में कार्यरत रिसर्च एनालिस्ट हैं और चीन-ताइवान संबंधों तथा भारत की विदेश नीति में दिलचस्पी रखती हैं।We discuss:* Ukraine War an

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत कैसे करें? How to Strengthen India's Energy Security
हालिया वैश्विक संकटों ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया है कि तेल (Oil) का आज भी कोई विकल्प नहीं है। पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट होते ही भारत में एलपीजी की किल्लत क्यों होने लगती है? आज की पुलियाबाज़ी में हम भारत के एनर्जी मिक्स की पड़ताल करेंगे, और चर्चा करेंगे कि भविष्य में अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए भारत और क्या कर सकता है।We discuss:* India’s Energy Mix* Why the push towards Natural Gas?

हिंदी साहित्य का स्वाद: कविता, कहानियाँ और किस्से। A Brief History of Hindi Literature ft. Arun Jee
दोस्तों, आज पुलियाबाज़ी पर लेते है मज़ा हिंदी कविता और कहानियों का। हिंदी साहित्य के जन्म से लेकर उसके आधुनिक रूप में ढलने तक की कहानी हमें सुनाते हैं हमारे मेहमान डॉ. अरुण जी, जो एक लेखक और अनुवादक हैं, और यात्रावृतांत और साहित्य समीक्षा में खास दिलचस्पी रखते हैं। हिंदी साहित्य के मुख्य काल खंडों और उनसे जुड़े महान कवी-कवियित्रीयों से वे हमें अवगत कराते हैं, साथ ही समकालीन और उभरते हिंदी लेखक और लेख

स्कैमलैंड्स: ठगी का वैश्वीकरण। Scamlands: Inside Global Multi-Billion Digital Fraud Industry ft. Snigdha Poonam
भारत में जब हम “डिजिटल इंडिया” की बात करते हैं, तो अक्सर हम इसके सुनहरे पक्ष को देखते हैं। लेकिन इस सिक्के का एक दूसरा और थोड़ा डरावना पहलू भी है—डिजिटल ठगी या स्कैम्स। आज जामतारा से लेकर गुड़गांव के पॉश दफ्तरों तक, स्कैमिंग एक पूरी ‘इंडस्ट्री’ बन चुकी है। भारत के कई युवानों के लिए ठगी अब एक करियर ऑप्शन बन गया है। आज हमारी मेहमान है पत्रकार और लेखिका स्निग्धा पूनम जिन्हों ने स्कैम इंडस्ट्री को नज़दी

एआई की झांकी: कोडिंग और डेटा एनालिसिस अब सबके लिए | AI Demo: Coding & Cool Projects for Everyone
नमस्ते! अक्सर लोग एआई को एक बेहतर गूगल सर्च की तरह इस्तेमाल करते हैं, पर अब यह आपका अपना “डिजिटल वर्कर” बन सकता है। पुलियाबाज़ी के इस विशेष झांकी एपिसोड में सौरभ और प्रणय एआई के प्रयोगों का लाइव डेमो दे रहे हैं। कोडिंग से लेकर जटिल आर्थिक डेटा के विश्लेषण तक, एआई अब केवल जवाब ही नहीं देता, बल्कि एक जूनियर एनालिस्ट की तरह काम भी करता है। इस चर्चा में हमने दिखाया है कि कैसे तकनीक का सही इस्तेमाल आपक

मैक्रो इकोनॉमी की मास्टर क्लास। Status of the Economy 2026 Explained ft. Narayan Ramachandran
पिछले साल दूसरी मुद्राओं के सामने भारतीय रुपया कमज़ोर हुआ है। साथ ही भूराजनीतिक उथल पुथल के चलते भारतीय शेयर बाज़ार भी हिला हुआ है। तो ऐसे में क्यों न हमारी अर्थव्यवस्था का एक ब्यौरा लिया जाए? आज की पुलियाबाज़ी एक मास्टरक्लास है, जिसमें हमारे मेहमान नारायण रामचंद्र जी अलग अलग आर्थिक पहलूओं को संदर्भ सहित समझाते हैं। हमें तो बहुत कुछ सीखने को मिला है इस क्लास में, आप भी जुड़िये और कुछ ज्ञान बटोर लीजिये

Agentic AI की धूम से भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियाँ ख़तरे में? Agentic AI and the Future of India’s IT Sector
AI is moving so fast it feels like we’re living in a sci-fi novel that’s being rewritten every single day. Since we can’t seem to look away, we’re diving back into this evergreen topic on Puliyabaazi. In this episode, we unpack the latest AI developments and tackle the big question: what does this mean for the IT industry? Is it an upgrade, a pivot, or a total overhaul for the workforce?We discuss

ज़मीन अधिग्रहण इतना पेचीदा क्यों? Why Is Land Acquisition So Messy in India?
भारत में जमीन की लेन-देन एक जटिल मामला है। इसमें जमीन का अधिग्रहण तो और भी पेचीदा होता है क्योंकि आम धारणा के विपरीत इसके लिए कोई एक कानून नहीं बल्कि कई कानूनों का जाल है। इस पेचीदा विषय को आसान बनाने के लिए आज पुलियाबाज़ी पर हमारे साथ जुड़ रहे हैं अंकित भाटिया जिन्होंने लंबे समय से इस विषय पर शोध किया है। आज की पुलियाबाज़ी में बात जमीन अधिग्रहण कानून के इतिहास से लेकर उसमें बदलाव की, और साथ ही चर्चा

कड़े श्रम कानून कैसे बनते हैं प्रगति में बाधा? Why do flexible labour codes matter for India? ft. Bhuvana Anand and Pranjal Chandra
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर चर्चा नए श्रम कानूनों की। कानून में क्या नए बदलाव आये हैं? भारत में फैक्ट्री में काम करने के समय पर किस प्रकार की पाबंदियाँ है? ये बाकि देशों की तुलना में कैसी हैं? इनसे भारत में फैक्टरियों के काम काज पर क्या असर पड़ता है? इन सब बातों की चर्चा प्रोस्पेरिती की सह संस्थापक भुवना आनंद और उनके सहयोगी प्रांजल चंद्र के साथ।We discuss:* What are the recent Labour Reforms?* Objection

Policy Perspective On Gig Work: नौकरी के नए मौके या श्रमिकों की मजबूरी?
Quick Commerce के इस दौर में प्लेटफॉर्म और वर्कर का रिश्ता कैसा होना चाहिए? क्या वर्कर के पास वाकई अपनी मर्ज़ी चलाने की ताकत है? क्या इस सेक्टर में ‘Protectionist’ नीतियां लाने से कामदारों की मदद होगी या उनका नुक्सान? तो चलिए, चाय की प्याली उठाइए और शुरू करते हैं आज की पुलियाबाज़ी।We discuss:* How to think about Gig Work?* Defining Gig Work* Our limited imagination of Gig Work* When Gig Work Becom

डेटा के सहारे भारतीय अदालतों की भूल-भुलैया कैसे पार करें? The Misaligned Incentives in India’s Justice System ft. Bhargavi Zaveri Shah
भारतीय न्याय व्यवस्था की बात आते ही सब को सनी देओल का मशहूर “तारीख़ पर तारीख़” डायलॉग तो याद आता ही है, पर असली सवाल ये है कि ऐसा क्यों है? ऐसा क्यों है कि हमारी न्याय व्यवस्था आम इंसान को समय पर न्याय दिलाने में नाकाम दिखाई पड़ती है? इसी बात की तह तक जाएँगी आज की हमारी मेहमान भार्गवी ज़वेरी शाह के साथ। इस चर्चा में हमारे लिए तो कई TIL मोमेंट्स आये, आप की भी जानकारी बढ़ेगी ये वादा है। तो सुनिए और अपने

वेनेज़ुएला, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय दोगलापन। US Attack on Venezuela, and Hypocrisy in International Relations
This week on Puliyabaazi, we discuss the Venezuela crisis. While this is still an ongoing issue, we take this opportunity to discuss the power dynamics and importance of hypocrisy in international relations. Do listen in. We discuss:* Did the U.S. attack Venezuela for its Oil?* Monroe Doctrine and America’s Sphere of Influence* Does America want Greenland’s rare earth minerals?* Hypocrisy in Inter

भारतीय एयरलाइन्स की हालत इतनी ख़स्ता क्यों? India’s Weak Regulatory Capacity in Aviation Sector
2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ। पिछले साल भारतीय एविएशन सेक्टर में काफ़ी उथल-पुथल मची रही। पहले AI171 का एक्सीडेंट और साल के अंत में इंडिगो की हज़ारों फ़्लइटो का कैंसिल होना। आखिर क्या वजह है कि दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते इस मार्केट में आज उँगलियों पर गिनने लायक खिलाड़ी ही बचे हैं? इस कहानी में नियामक संस्थाओं की क्या भूमिका रही? क्या यह मार्केट पावर का खेल ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ रहा है? इसी पर आज

पुलियाबाज़ी वाली हिंदी का मतलब क्या? How Do We Discuss New Ideas in Hindi?
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर चर्चा पुलियाबाज़ी के बारे में ही। साल का आख़िरी एपिसोड है और अभी अभी पुलियाबाज़ी पत्रिका भी प्रकाशित हुई है, तो इस मौके पर इस पत्रिका की भाषा पर भी थोड़ी चर्चा हो जाये। हिंदी में अक्सर टेक्निकल शब्दों की कमी महसूस होती है, तो अर्थशास्त्र या लोकनीति से जुड़े अटपटे शब्दों के लिए हिंदी में शब्द कैसे खोजे? इसी बात पर आज की पुलियाबाज़ी सुनिए, हमारी नयी पत्रिका पढ़िए, और अगर पसंद तो अपने

सरकारी शिक्षा व्यवस्था क्यों चरमराई हुई है? How to improve education in India? ft. Yamini Aiyar
हमारी सरकारी स्कूलों में शिक्षा का हाल ये है की पाँचवी कक्षा में पढ़ रहे बच्चों में से केवल 34% बच्चे ही दूसरी कक्षा की किताब पढ़ पाते हैं। ऐसे में ये सवाल जायज़ है कि क्या हमारे स्कूल बच्चों को वास्तव में सीखा रहे हैं, या सिर्फ सिलेबस पूरा कर रहे हैं? आखिर हमारी सरकारी शिक्षा व्यवस्था इतनी चरमराई हुई क्यों है? आज की पुलियाबाज़ी में हम इस मुद्दे की तह तक जाएँगे यामिनी अय्यर के साथ।We discuss:* Why is

सिर्फ राजनेताओं ने नहीं, भारतीय जनमानस ने हमारा संविधान पिरोया है। How Public Movements Shaped Indian Constitutionalism? ft. Rohit De and Ornit Shani
26 नवम्बर 1949 को भारत ने अपना संविधान अपनाया था। इस अहम् घड़ी को याद करने और उस समय हो रहे बदलाव को समझने का ये अच्छा मौका है। इसमें आम धारणा ये है कि संविधान को कुछ गिने-चुने अभिजात वर्ग के लोगों ने बनाया और भारत की आम जनता पर थोप दिया। लेकिन इस धारणा में कितनी सच्चाई है?इतिहासकार रोहित डे और ऑर्नित शनी अपने शोध के आधार पर इस बात का खंडन करते हैं। अपनी किताब Assembling India’s Constitution में वो

भारत की भावनात्मक एकता की खोज। The Unfinished Business of India’s Emotional Integration
भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर थोड़ी दूर पर भाषा बदल जाती है, खाना बदल जाता है और पहनावा बदल जाता है। हम नक़्शे पर तो एक हैं, लेकिन क्या हम दिलों से भी एक हैं? आज हम बात करेंगे एक ऐसे सवाल की जो आज़ादी के वक़्त भी था और आज भी हमारे सामने खड़ा है: भारत का भावनात्मक एकीकरण कैसे हो?इस मुद्दे को पहली बार 1961 में गठित एक कमिटी ने समझने की कोशिश की थी और अपने संशोधन और सुझाव उन्होंने Report of the Committee on

कैसे हुआ अर्जेंटीना का बेड़ा ग़र्क़? Lessons from Argentina’s Economic Decline
पिछले हफ़्ते हमने बात की थी कि कैसे टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की बदौलत कुछ देश लंबे समय तक आर्थिक प्रगति कर पाये। लेकिन, आर्थिक विकास का होना हमेशा तय नहीं होता। २०वीं सदी की शुरुआत में अर्जेंटीना तेज़ी से बढ़ रहा था, लेकिन बाद में उसके विकास का चक्का अटक सा गया। तो आइये, आज की पुलियाबाज़ी में अर्जेंटीना के आर्थिक पतन से कुछ सबक सीखते हैं।We discuss:* Background on Argentina* Economic Growth in Argentin

इंदिरा, आपातकाल और उभरता कैसरवाद। The Indira Era ft. Srinath Raghavan
2025 में इमरजेंसी के 50 साल पूरे हुए, तो हमने सोचा क्यों न भारत के लोकतंत्र के इस काले प्रकरण पर भी कुछ रोशनी डाली जाये? इस बात पर विस्तार से चर्चा करने किए लिए हमारे साथ जुड़ते हैं जाने माने इतिहासकार श्रीनाथ राघवन जी। तो ये पुलियाबाज़ी सुनिए और अपने सवाल या टीका-टिप्पणी हमसे साझा कीजिये।We discuss:* Crisis in India in the late 60s* What is Caesarism?* Indira Gandhi’s Leadership* The flip-flops on

आर्थिक वृद्धि की नोबेल विजेता रेसिपी क्या? The Secret Ingredient for Sustained Economic Growth
लंबे समय तक निरंतर विकास का नुस्खा क्या है? किन परिस्थितियों में इनोवेशन से प्रेरित विकास फलता-फूलता है? ऐसा क्यों है कि कुछ देश इसे हासिल कर पाते हैं, जबकि दूसरे असफल रह जाते हैं? इस हफ्त पुलियाबाज़ी पर हम ‘रचनात्मक विनाश’ की तर्ज पर दिए गए अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के संदर्भ में इन्हीं विषयों पर चर्चा करेंगे।We discuss:* What is Aghion and Howitt’s model for growth?* Joel Mokyr’s contribution

भारत की विकास यात्रा उल्टी-पुल्टी क्यों? India’s Precocious Development Odyssey ft. Devesh Kapur and Arvind Subramanian
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर एक शानदार चर्चा दो बहुत ही ख़ास मेहमान के साथ। पुलिया पर हमारे साथ जुड़ रहे है प्रसिद्ध पोलिटिकल साइंटिस्ट प्रोफ़ेसर देवेश कपूर और भारत के चीफ़ इकोनॉमिक एडवाइज़र रह चुके अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमनियन। चर्चा है आज़ाद भारत की विकास यात्रा पर—किन चीज़ों में हम सफल रहे? क्या गलतियाँ हुई? इन्हें कैसे ठीक करें ताकि आगे हमारी प्रगति की राह बनी रहे? इन सभी सवालों पर खुलकर बातचीत।We discus

अमेरिका और चीन के सामने भारत के पत्ते? How Should India Negotiate with the US and China?
व्यापार टैरिफ को लेकर अमेरिका और चीन के बीच गहमा गहमी जारी है। इसी बीच अमरीका ने भारत से आने वाले सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया। चीन ने तो पहले से ही भारत पर कई महत्वपूर्ण उत्पादों पर एक्सपोर्ट बैन लगाया हुआ था। तो इस खेल में भारत क्या पत्ते खेल सकता है? किन मुद्दों पर भारत अपनी बड़ी मार्केट के बल पर नेगोशिएट कर सकता है? इसी पर आज की पुलियाबाज़ी।We discuss:* India as a Swing Power?* Opportunity for re

एक और सफ़रनामा: अय्याशी की नगरी और कनाडा की राजधानी। Las Vegas and Ottawa
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी टीम जगभ्रमण पर निकली थी तो हमने सोचा की श्रोताओं को इस सफ़र का ब्यौरा देना तो बनता है। तो पेश है और एक सफ़रनामा अय्याशी की नगरी लास वेगस और कनाडा की राजधानी ओटावा का।We discuss:* Sincity Las Vegas* How Vegas was built* Entertainment at Industrial Scale* Trade Exhibition* Canada’s dependence on the US* Notes from OttawaAlso, please note that Puliyabaazi is now available on Youtube

न्याय पाने का निजी रास्ता। All About Arbitration. ft. Prashant Narang
न्याय व्यवस्था लोकनीति का एक ऐसा पहलु है जिसके लिए हम सभी पूरी तरह से सरकारी तंत्र पर निर्भर हैं। भला इसमें मार्केट कैसे हो सकता है? वैसे मोटे तौर पर ये बात सही है लेकिन कुछ प्रकार के झगड़े सरकारी न्याय तंत्र के बाहर भी सुलझाए जाते हैं। इसे कहते हैं आर्बिट्रेशन याने कि मध्यस्थता। इसी विषय को विस्तार से समझेंगे ट्रस्टब्रिज से जुड़े लीगल एक्सपर्ट प्रशांत नारंग के साथ।We discuss:* What is Arbitration?*

भारत के परमाणु प्रोग्राम की दास्ताँ। The History of India’s Nuclear Programme ft. Yogesh Joshi
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर हमने क्लास लगायी भारत की परमाणु हथियार बनाने के सफ़र पर। भारत के परमाणु प्रोग्राम की शुरुआत से लेकर पहली नुक्लिअर सबमरीन बनने तक की कहानी और उसके पीछे की राजनीति और विज्ञान, इन सब को विस्तार में समझाते है प्रोफ़ेसर योगेश जोशी।We discuss:* The beginning of India’s nuclear programme* What was the initial goal of India’s nuclear programme?* The pivot to Nuclear Weapons* Cost of P

EP300 Special अभी तो बस शुरुआत है। आपके सवाल, हमारे जवाब। Ask Us Anything
पुलियाबाज़ी का एपिसोड नंबर 300 हाज़िर है। ये हमारे लिए ख़ास मक़ाम है और शायद ये आप सब की हौसला अफ़ज़ाई के बिना मुमकिन नहीं होता था। इसी लिए आज चर्चा आपके सवालों पर। हमें अपने सवाल भेजने के लिए श्रोताओं का शुक्रिया। कुछ के जवाब हमने दिए है, बाकी के हम अगले एपिसोड्स में डिसकस करेंगे। वैसे अगर आप हमसे पूछे तो हम तो यही कहेंगे कि अभी तो बस शुरुआत है।Prebook your complimentary copy of Puliyabaazi Magazine he

अटल बिहारी वाजपेयी: कवि, प्रचारक, राजनीतिज्ञ। Biography of Atal Bihari Vajpayee ft. Abhishek Choudhary
Atal Bihari Vajpayee was a much loved and adored Prime Minister. As a politician who was also a poet and a great orator, he is often seen as a moderate or even liberal leader. But his legacy is more complicated than meets the eye. He often straddled uncomfortably between secular India and its sectarian polity. Today, Vajpayee’s biographer Abhishek Choudhary joins us on Puliyabaazi to discuss the m

EP298 हमारे शहरों को चलने लायक कैसे बनाएँ? How to Improve Walkability of Indian Cities? ft. Walking Project
पुलियाबाज़ी में अक्सर इस बात का ज़िक्र हुआ है कि हमारे शहरों में पैदल चलना कितना मुश्किल हो गया है, और हम सब अपने आम जीवन में भी इसको महसूस तो करते ही हैं। इसीलिए, आज हमारे मेहमान हैं Walking Project के कन्वीनर ऋषि अग्गरवाल जी जो इस मुद्दे पर लंबे समय से काम कर रहे है और लोगों एवं नगरपालिका अधिकारीयों में इस विषय पर जागृति बढ़ाने का काम कर रहे हैं।We discuss:* Why is the walkability of our cities so

आवारा कुत्तों की समस्या: जनस्वास्थ्य या नैतिकता का मामला? The Irrational Laws Behind India’s Stray Overpopulation
क्या आपको पता है कि भारत में तकरीबन ६ करोड़ आवारा कुत्तें हैं और हर साल १ करोड़ ७० लाख लोगों को कुत्तें काटते हैं? इस विषय पर वैसे तो काफ़ी चर्चा हो चुकी है पर ज़्यादातर लोग इस मुद्दे को नैतिकता की दृष्टि से देखते हैं, तो पुलियाबाज़ी पर हमने इसे लोकनीति के नज़रिये से समझने की कोशिश की।We discuss:* Supreme Court’s verdict on strays* What are the existing laws?* Should this decision be made at the Union l

युद्ध का नया युग। Drones Herald a New Age of Warfare ft. Aditya Ramanathan
उक्रैन और रूस की जंग में यूक्रेन ड्रोन जैसे नए और अनोखे हथियारों से रूस की पारम्परिक सैन्य शक्ति को बख़ूबी टक्कर दे रहा है। इससे तो ऐसा ही लगता है कि भविष्य की सेनाएँ और रणभूमि आज से बहुत अलग होने वाली है। युद्ध के इस बदलते स्वरुप पर चर्चा के लिए हमारे साथ जुड़ते हैं आदित्य रामनाथन जो तक्षशिला इंस्टीटूशन से जुड़े रिसर्च फेलो हैं और मिलिट्री स्ट्रेटेजी में खासी दिलचस्पी रखते हैं।We discuss:* How has t

विकसित भारत के लिए टॉप10 उपाय। 10-Point Road Map for a Developed India
इस हफ़्ते आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं। इस ख़ास मौके पर हम ने सोचा कि क्यों न थोड़ा सा सोचें कि हमारे भविष्य का भारत कैसा होना चाहिए। अगर हम भारत को एक विकसित देश के रूप में देखना चाहते हैं, तो फिर उसकी परिकल्पना क्या होगी और हम वहाँ तक कैसे पहुँचेंगे। कौन से वो दस अत्यंत ज़रूरी पॉलिसी उपाय हैं, जो हमें आज करने पड़ेंगे ताकि हम एक विकसित देश बनने का वो सपना पूरा कर पाएं? इस बात पर आज की पुल

अमीर भारतीयों का भारत से पलायन। From Brain Drain to Wealth Drain. ft. Sanjaya Baru
2024 में २ लाख से ज़्यादा भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी। ज़्यादातर प्रवासी भारतीय भारत लौटना नहीं चाहते। भारत से ब्रैन ड्रेन तो काफ़ी दशकों से चल रहा है, पर अब भारत के अमीर अपनी धन संपदा सहित भारत छोड़ रहे हैं। ऐसे में इस बात पे ये चिंतन तो ज़रूरी है कि इस पलायन से भारत को कितना नुकसान हो रहा है, और इसे कैसे रोका जाए। इसी बात पर गहराई से चर्चा करने के लिए हमारे साथ जुड़ रहे हैं डॉ. संजय बारू जी। डॉ.

तितली से तूफ़ान। Predictability Amidst Chaos ft. Climate Scientist Prof. Jagadish Shukla
इस हफ़्ते आपके लिए एक बार फिर एकदम nerdy और technical पुलियाबाज़ी हाज़िर है। क्लाइमेट पर ऊपरी तौर पे तो काफ़ी चर्चा होती है पर इसके विज्ञान तक शायद ही कोई जाता है। तो इसी लिए हमने होमवर्क किया और पहुँच गए प्रोफ़ेसर शुक्ला की क्लास में। प्रोफ़ेसर जगदीश शुक्ला प्रसिद्ध क्लाइमेट साइंटिस्ट है और 2007 में अल गोर के साथ नोबेल प्राइज जीतने वाली IPCC टीम के मेंबर रह चुके हैं, तो इस विषय को उनसे बेहतर भला कौन सम

चीन का चक्रव्यूह। China's Economic Warfare is a Market Failure
नमस्ते! पुलियाबाज़ी पर आज की चर्चा चीन और भारत के बीच चल रहे व्यापारिक अनबन पर। क्या चीन का भारत को कई महत्वपूर्ण चीज़ों का निर्यात रोकना सिर्फ एक व्यापारिक कदम है या इससे ज़्यादा कुछ? चीन के इस चक्रव्यूह को भेदने के लिए भारत क्या कर सकता है? आज की पुलियाबाज़ी पर हमारी कोशिश है कि इस मुद्दे को एक नए नज़रिये से देखें, तभी शायद इसे भेदने के कुछ उपाय नज़र आ सकते हैं। तो आप भी सुनिए और अपने विचार हमारे साथ

झुग्गी झोपड़ियों का समाधान है सौ नये शहर। How to Solve India’s Housing Crisis? ft. Prof. Gurbachan Singh
High price of land in India has made housing unaffordable for a majority of urban Indians, who have no option but to live in congested slums or unauthorized housing. While this is a burning issue for the public, it hasn’t received enough policy attention. What can be a long term solution to provide good, legal and affordable housing to more Indians?This is our second episode with independent econo

बोल बच्चन, छुपा रुस्तम या पेचीदा? Overrated, Underrated, Complicated!
This week we have a fun chat where we discuss a range of topics and mark them as overrated, underrated or complicated! Listen in and tell us what you think!Oh! and this week we have a few contest announcements to make. If you are interested, do check out the details here.We discuss:* Schooling in mother tongue* Jugaad* Going to a good college* Manufacturing* Metro for Public Transport* UPI* Emigra

भारत-यूरोपीय संघ के बीच नयी संभावनाएँ। New Possibilities in India-EU Relations
दुनिया में बदलते आंतरराष्ट्रीय समीकरणों के चलते भारत और यूरोपीय संघ के बीच बेहतर संबंधों के आसार नज़र आ रहे हैं, पर भारत में यूरोपीय संघ के बारे में चर्चा कम ही होती है। इसीलिए हमने सोचा कि इस विषय पर किसी विशेषज्ञ से बात की जाए। इस एपिसोड पर हमारे साथ पुलियाबाज़ी के लिए जुड़ रही है गरिमा मोहन जो जर्मन मार्शल फंड ऑफ़ यूनाइटेड स्टेट्स में सीनियर फेलो हैं और यूरोपीय संघ पर लंबे समय से अध्ययन कर रही हैं।

जापान सफ़रनामा। Tokyo, Trains, and the Atomic Shadow
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर और एक सफ़रनामा। इस बार चलिए करते हैं जापान की सैर। ३.५ करोड़ की आबादी वाला शहर टोक्यो कैसे चलता है? एटॉमिक बम से धराशयी होने वाला शहर हिरोशिमा आज कैसा दीखता है? जापान के अद्यतन पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भारत क्या सीख सकता है?We discuss:* Public Transport in Japan* Innovation in public transport funding* Land readjustment for urban development* Pedestrian friendly cities* Meiji res

इंटरनेट के अनगिनत चेहरे Digital Anthropology and Internet Culture ft. Shephali Bhatt
This week on Puliyabaazi, a fun conversation with tech reporter Shephali Bhatt on the fast changing world of internet trends and creator economy. We discuss:* How has internet culture changed over time?* Reel ki Duniya* Fan following is the new currency* Is social media an essential part of doing business?* Is phone addiction increasing or decreasing?* India’s equivalent of WeChat* Are creators de

Untangling the Sedition vs. Freedom of Expression Debate राजद्रोह बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर चर्चा राजद्रोह जैसे गंभीर विषय पर। राजद्रोह आखिर होता क्या है? अक्सर इस शब्द को लेकर हमारी समझ कुछ उलझी सी रहती है। एंटी-नेशनल शब्द को लेकर भी ऐसा ही हाल है। पर पोलिटिकल साइंस में इन शब्दों का एक विशिष्ट अर्थ होता है जिसे समझने से इस मुद्दे पर कुछ रोशनी डाली जा सकती है। तो आइये राजद्रोह बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस के कुछ तार खोलते हैं आज की पुलियाबाज़ी में।We discuss

The Dominance of War-Elephants in India. हाथियों का युद्ध में इस्तेमाल।
नमस्ते, पुलियाबाज़ी में आज हम एक हटके विषय पर चर्चा करेंगे—युद्ध में हाथियों का प्रयोग। यह विषय हमें काफी इंटरेस्टिंग लगा, तो हमने सोचा कि क्यों न इस पर आदित्य रामनाथन से बात की जाए। आदित्य तक्षशिला इंस्टीटूशन के साथ एसोसिएट फैलो हैं और मिलिटरी हिस्ट्री में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। इस पुलियाबाज़ी पर चर्चा इतिहास के उस दौर की जब भारत एक ‘आर्म्स एक्सपोर्टर’ हुआ करता था। भारत के हाथी और उनको काबू में कर

नौकरी का भविष्य। What Could a Jobless World Look Like?
This week on Puliyabaazi, we take a leap of imagination into the world of the future. With ever increasing AI adoption and automation, is a jobless world imminent? What will be the nature of jobs for humans in such a world? How will human society cope with such a disruption?ये पुलियाबाज़ी हमारे लिए तो काफ़ी मज़ेदार रही, आप भी हमारे साथ इस ख़याली पुलाव पकाने में लग जाईये और अपनी कुछ टिप्पणियाँ हो तो वो

बँटवारे की परछाई भारत-पाक संबंधों पर। The Shadow of Partition on India-Pak Relations
पिछले कुछ दिनों से भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे टकराव को आप सभी ने देखा ही होगा। इससे जुड़ी खबरें और अफवाहों से भी हम सभी वाकिफ हैं। ऐसे माहौल में क्यों न इस विषय को थोड़ी शांति से और अकादमिक दृष्टिकोण से देखा जाए?आज हमारे साथ पुलियाबाज़ी पर जुड़ रहे हैं अतुल मिश्रा, जो शिव नादर इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस में इंटरनैशनल रिलेशन्स के प्रोफेसर हैं। उनकी किताब भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को पार्टिशन और स

ख़राब सरकारी नियमों से चंगुलतोड़ का मैनिफेस्टो। A Framework for Deregulation in India.
एक गणतंत्र में संविधान के ज़रिये सरकार की शक्ति पर रोक लगायी जाती है, पर भारत में हम देखते हैं कि अक्सर होता इससे ठीक उल्टा है। सरकार ही भारतीय नागरिकों पर इतनी रोक लगाती है कि पूछो ही मत। और हम नागरिकों को भी इसकी इतनी आदत पड़ चुकी है कि हम पूछते भी नहीं कि ये नियम हम पर क्यों लगाए जा रहे हैं। प्रणय ने तो बेकार नियमों के इस जाल को सरकार का चंगुल कहा है।खैर, अच्छी बात ये है कि अब सरकार ने भी इस चंगु

क्रांति के दौर में दोस्ती की कहानी। Friendship amidst the Indian National Struggle ft. Amb. TCA Raghavan
The story of the Indian National Movement is often told from the accounts of great leaders like Gandhi, Nehru or Patel. However, India’s freedom struggle was a great cause that had attracted many young and bright minds of India at the time—Sarojini Naidu, Asaf Ali, Syed Hossain, and friends. The shared cause built many friendships—some survived the test of time, some did not; but their personal ex

अराजकता का व्याकरण। Grammar of Anarchy: Ambedkar’s Iconic Speech in Hindi
25 नवंबर 1949 के दिन डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान सभा में अपना आखिरी भाषण दिया था। ये भाषण ‘Grammar of Anarchy’ या ‘अराजकता का व्याकरण’ के नाम से जाना जाता है। संविधान का निर्माण हो चूका था, लेकिन राष्ट्र निर्माण का काम अभी बाकी था। क्या इस भगीरथ कार्य के लिए भारत का संविधान सही ढांचा प्रदान कर पायेगा? ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन होने के नाते बाबासाहेब के मन में कई चिंताएं थीं जिन्हें वो इस भा

What's Common Between Termites, Economy, and Traffic? दुनिया की जटिलता समझने के लिए एक चश्मा ft. Suri Venkatachalam
We live in a complex world. However, as humans, we are accustomed to finding answers by simplifying this complexity. But what do we do when simple models fail to answer the questions of complex systems? What are the methods to understand complex systems? What happens when we start looking at the world with the lens of complexity? We had a lot of fun discussing this topic with our guest Suri Venkat

Struggles of Young Men and Boys भारत में लड़कों की परेशानियाँ—कुछ अनकही बातें।
This week on Puliyabaazi, we delve into the unique challenges faced by young men and boys—from the pressures of traditional masculinity and cultural expectations to mental health and the impact of issues like addiction and migration. Our guest Natasha Joshi, Associate Director at Rohini Nilekani Philanthropies, talks about the various initiatives that are working on these issues, and the many lear

बदलती विश्व व्यवस्था। The Changing World Order: Kya Apna Time Aayega?
नमस्ते। इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर प्रणय ने एक मज़ेदार अवलोकन किया। प्रणय को लगता है कि आज की दुनिया ऐसी लगती है मानो कोई प्रियदर्शन फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा हो। कहीं भी, कभी भी, कुछ भी हो सकता है। ऐसे उलट पुलट के दौर में पुलियाबाज़ी पर इसका विश्लेषण तो बनता है। क्या होती है विश्व व्यवस्था? बदलती व्यवस्था के साथ क्या देशों के भाग्य भी बदलेंगे? और बदलेंगे तो कैसे? इन सब बातों पर आज की पुलियाबाज़ी। सुनिए

Women, Sports, and Citizenship. खेल, हक़ और आज़ादी ft. Sohini Chattopadhyay
क्या हमारे देश की महिलाओं की आज़ादी पर एक लक्षमण रेखा खींची हुई है? क्या भारत में public sphere में औरतों की नागरिकता पर कुछ सीमाएं है और क्या खेल के ज़रिये इन बंदिशों से कुछ महिलाओं को मुक्ति मिल पाती है? आज की पुलियाबाज़ी पर बातचीत महिला एथलीट्स पर। चर्चा के लिए हमारे साथ जुड़ रही हैं लेखिका और पत्रकार सोहिनी चट्टोपाध्याय जिन्होंने अपनी किताब The Day I Became a Runner में महिला खिलाडियों के ज़रिये भा

Critical Minerals are not like Oil. महत्वपूर्ण खनिजों की राजनीति।
नमस्ते दोस्तों। इस हफ़्ते पुलियाबाज़ी पर चर्चा Critical Minerals याने कि महत्वपूर्ण खनिजों के बारे में। प्रेसिडेंट ट्रम्प और यूक्रेन के प्रेसिडेंट ज़ेलेन्स्की की मीटिंग के बाद ये मुद्दा चर्चा में है। कई लोग इन खनिजों की तुलना तेल से कर रहे हैं, पर क्या ये तुलना सही है? ये सवाल महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसी धारणा के ऊपर अगले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति होती नज़र आएगी। तो आइये, इस पुलियाबाज़ी प

Nuclear Deterrence Strategy. परमाणु युद्ध के खतरे को कैसे घटायें? ft. Dr. Manpreet Sethi
With increasing political uncertainties, the risk of nuclear war has also risen. To highlight this heightened danger and urge greater caution, the Bulletin of the Atomic Scientists has moved the Doomsday Clock forward by one second, bringing us just 89 seconds away from catastrophe! But what does this really mean? We spoke with Dr. Manpreet Sethi, Distinguished Fellow at the Centre for Air Power S

Will AI Disrupt Jobs? AI और रोज़गार का एक नया दौर
आज कल जिस तेज़ी से AI मॉडल्स आ रहे हैं, ये सवाल तो उठना जायज़ है कि क्या इंसानों की नौकरियाँ खतरे में हैं? इस सवाल का जवाब तो कोई नहीं जानता लेकिन इस पर पुलियाबाज़ी तो बनती है। आप भी सुनिए और हमें बताइये कि आप के विचार क्या हैं? क्या AI में आपको आपदा नज़र आती है या अवसर?We discuss:* How is Generative AI different from traditional computing?* How AI systems learn?* The speed of AI adoption* Is AI bette

Why is land so costly in India? ज़मीन के दाम की ज़मीनी हकीकत
भारत में ज़मीन के दाम इतने ज़्यादा क्यों हैं? ये सवाल तो हम सभी के मन में उठता है और अक्सर हमें ये जवाब भी सुनने को मिलता है कि हमारी भारी जनसँख्या की वजह से भारत में ज़मीन की कमी है और इस लिए दाम भी ज़्यादा है। लेकिन आज के हमारे मेहमान इस मुद्दे को एक अलग दृष्टिकोण से देखते हैं। आज हमारे साथ पुलियाबाज़ी पर जुड़ रहे हैं प्रोफ़ेसर गुरबचन सिंह जिन्होंने भारत में ज़मीन और रियल एस्टेट सेक्टर का विश्लेषण किया

All About Deep Tech Ecosystem in India
नमस्कार दोस्तों! आज की पुलियाबाज़ी पर सौरभ हमें लेकर जायेंगे डीप टेक की दुनिया में। साथ ही, हम डीप टेक्नोलॉजी के कुछ अहम पहलुओं पर भी चर्चा करेंगे, जैसे इसका इकोसिस्टम कैसा है, भारत के लिए इस क्षेत्र में संभावनाएं क्या हैं और 'मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड' के सिद्धांत को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। सौरभ की ये मास्टरक्लास सुनियेगा ज़रूर।We discuss:* What is Deep Tech?* Thiel’s 3 kinds of start-ups* Ele

Real Reasons for Maruti’s Success मारुति की सफलता का राज़
In this video, Pranay explains the secret of Maruti’s success story. How Maruti, a government-owned company, created history in India’s automobile sector. Was it because the government adopted a protectionist approach and kept foreign players out of the market? Or it did exactly opposite of this? Listen to this short explainer video based on insights from Montek Singh Ahluwalia’s book – Backstage,

चोला साम्राज्य का इतिहास। Chola Kings, Merchants and Temples ft. Anirudh Kanisetti
आज की पुलियाबाज़ी चोल साम्राज्य के बारे में। यह एकमात्र भारतीय साम्राज्य था जिसने उपमहाद्वीप के बाहर जाकर दक्षिणपूर्व एशिया तक जीत हाँसिल की थी। कोई पूछ सकता है कि 1000 साल पहले के साम्राज्य की कहानी से आज का क्या लेना देना। वैसे इस सवाल का जवाब तो हमारे मेहमान अनिरुद्ध कनिसेट्टी ही चर्चा के दौरान बहुत अच्छे से देते हैं। लम्बे जवाब के लिए तो चर्चा सुननी पड़ेगी। संक्षिप्त में बताएं तो राजनीति और राजन

भारत का विश्वशास्त्र। India’s Foreign Policy in a New World Order ft. Dhruva Jaishankar
With the return of President Trump, the US is renegotiating the terms of trade and engagement not only with its adversaries, but also its allies. This is surely an interesting time for the world of international relations and diplomacy. What are the characteristics of this new world order that is shaping up? What opportunities and threats does it pose for India?We discuss this and more with Dhruva

Why Is India’s Liquor Policy So Weird?
हमारी एलकोहॉल नियंत्रण पॉलिसी इतनी अजीबोग़रीब क्यों है? एलकोहॉल सेहत के लिए हानिकारक होने से ये बात तो जायज़ है कि सरकार इस पर कुछ नियंत्रण रखें और वो हमारी सरकारें रखती भी हैं। पर दूसरी तरफ सरकार को एलकोहॉल की बिक्री से मिल रहा टैक्स भी चाहिए। इसी दुविधा में सरकार भी कंफ्यूज हो जाती है कि आखिर वो करना क्या चाहती है। आज हम इस मुद्दे को एक केस स्टडी की तरह देखेंगे और इससे कुछ पॉलिसी के पाठ खोजने की क
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