
Storybox with Jamshed Qamar Siddiqui
जमशेद क़मर सिद्दीकी के साथ चलिए कहानियों की उन सजीली गलियों में जहां हर नुक्कड़ पर एक नया किरदार है, नए क़िस्से, नए एहसास के साथ. ये कहानियां आपको कभी हसाएंगी, कभी रुलाएंगी और कभी गुदगुदाएंगी भी. चलिए, गुज़रे वक्त की यादों को कहानियों में फिर जीते हैं, नए की तरफ बढ़ते हुए पुराने को समेटते हैं. सुनते हैं ज़िंदगी के चटख रंगों में रंगी, इंसानी रिश्तों के नर्म और नुकीले एहसास की कहानियां, हर इतवार, स्टोरीबॉक्स में.
Episodes
प्रेमचंद की सीक्रेट डायरी: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
मुंशी प्रेमचंद की मौत के 90 साल बाद एक शख्स को मिली उनकी लिखी हुई एक डायरी. क्या था उस डायरी में जिसके बाद इलाके में मच गया हड़कंप, और कौन था वो ज़िला कलेक्टर जिसने हर कीमत पर उसे आम जनता से छिपाए रखने की कोशिश की? सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'प्रेमचंद की सीक्रेट डायरी' स्टोरीबॉक्स में. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal
अंग्रेज़ का भूत: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
मैं जिस जंगली इलाके में गाड़ी खराब होने की वजह से फंस गया था, वहां सौ साल पहले नील के खेत हुआ करते थे. जंगल के बीचोंबीच मैं एक पुराने मकान में रात भर के लिए ठहर गया, जहां एक अंग्रेज़ अफ़सर की मौत हुई थी. उस रात जो हुआ मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा. सुनिए सत्यजीत रे की कहानी 'इंडिगो' का एक हिस्सा स्टोराबॉक्स में. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal & Rohan Bha
शमशुद्दीन का बकरा: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
महरौली में रहने वाले शमशुद्दीन का बकरा पूरी दिल्ली में मशहूर था. जमनापारी था, बड़े-बड़े कान, घुमावदार सींघ और तन के खड़ा हो जाए तो पूरा गधा मालूम होता था. शमशुद्दीन एक रोटी खुद कम खा सकते थे, मगर अपने बकरे को बिना चने खिलाए उन्हें नींद नहीं आती थी. लेकिन आख़िर एक रात को ऐसा क्या हुआ कि पूरा मोहल्ला उस बकरे के बाल को तावीज़ बनाकर पहनना चाहता था. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए 'शमशुद्दीन का बकरा 'स्टो
लखनऊ वाले वकील साहब: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
लखनऊ में एक थे वकील साहब जो बड़े उर्दू दां थे. उन्हें उर्दू से इस क़दर इश्क़ था कि किसी को ग़लत उर्दू बोलते सुन लें तो फ़ौरन टोक देते थे, पर क्या हुआ जब उनकी इकलौती बेटी इरम को इश्क़ हो गया एक ऐसे रीलबाज़ लड़के से जो शक्कर को भी सक्कर बोलता था और लखनऊ को नखलऊ. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से उन्हीं की लिखी कहानी 'लखनऊ वाले वकील साहब'. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed
हमशक्ल: स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
कैसा हो अगर कभी कहीं घूमते हुए किसी सुनसान जगह पर आपको मिल जाए आपका एक 'हमशक्ल' जिसकी आवाज़ भी आपकी जैसी ही हो. बातचीत में पता चलता है कि उसका और आपका शहर भी एक है और उसकी जेब में उतने ही पैसे हैं जितने आपकी जेब में. आप की पहली प्रेमिका के नाम से लेकर, कॉलेज में आए नंबर तक सब कुछ एक जैसा है... ऐसे में क्या आप जानना चाहेंगे कि ये अजनबी कौन है और आप दोनों के बीच इतनी समानताएं क्यों हैं? कहीं ये कोई
दस पैसे और दादी | गुलज़ार की कहानी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सिर्फ़ दस पैसे के लिए दादी से लड़ाई करके घर से भागा 'चक्कू' गुस्से में रेलवे स्टेशन पहुंच गया और चलती ट्रेन में बैठ गया, लेकिन ट्रेन में बैठने के बाद उसने देखी एक दूसरी दुनिया जहां गरीबी थी, दर्द था और थी एक लावारिस लाश. सुनिए गुलज़ार की लिखी कहानी 'दस पैसे और दादी' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. Producer - Maaz Siddiqui Narrator - Jamshed Qamar Siddiqui Sound - Aman Pal
सत्यार्थी V/s मंटो | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
कहानी सआदत हसन मंटो पर बनाए एक किरदार नफ़ासत हसन की, जो लिखी उनके दोस्त देवेंद्र सत्यार्थी साहब ने. ये उन्होंने उस कहानी के जवाब के तौर पर लिखी जो मंटो ने लिखी थी 'देवेंद्र' को 'हरेंद्र' बनाकर. तो सुनिए कहानी नफ़ासत हसन की जिसने नई नौकरी मिलने की खुशी में दोस्तों को एक दावत दी, दावत में किन मौलाना से हो गया नफ़ासत का झगड़ा और किसे शक हुआ कि नफ़ासत एक फ्रैंच राइटर की लिखी बातों को अपनी कहानियों मे
मंटो V/s सत्यार्थी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
रमेश एक तरक्की पसंद कहानीकार है जिसे बड़े-बड़े राइटर्स और शायरों को अपने घर दावत पर बुलाने का शौक है, एक रोज़ उसके घर पर एक ऐसा राइटर आता है जिसके आने के बाद रमेश को अफ़ सोस होता है कि काश उसे न बुलाया होता, सुनिए सआदत हसन मंटो की कहानी 'तरक्की पसंद' स्टोरीबॉक्स के इस खास सेगमेंट 'मंटो V/s सत्यार्थी' के पहले हिस्से में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
मोहल्ले की लड़ाई | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
ये कहानी है एक ऐसे चचा कि जो मुहल्ले में होने वाली लड़ाइयों में ऐसे बीच-बचाव कराते थे कि लड़ाई और भड़क उठती थी. सुनिए इम्तियाज़ अली ताज की लिखी कॉमेडी कहानी ‘चचा छक्कन’ का हिस्सा 'मोहल्ले की लड़ाई' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह
इच्छा मृत्यु - पार्ट 3 | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
इच्छा मृत्यु का एक केस जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया, उस मामले ने एक डॉक्टर को कैसे बना दिया क़ातिल? और कौन था निरंजन जिसने डॉक्टर को मजबूर किया कि वो अपने ही एक मरीज़ का ऑपरेशन थियेटर में इलाज के दौरान क़त्ल कर दें. सुनिए 'स्टोरीबॉक्स' में कहानी, इच्छा मृत्यु, का तीसरा हिस्सा जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह
इच्छा मृत्यु - पार्ट 2 | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक मरीज़ की इच्छा मृत्यु की याचिका कोर्ट ने नामंज़ूर कर दी. उसका दर्द और तकलीफ़ देखकर डॉक्टर मिर्ज़ा ने दया दिखाते हुए उसे ज़हर का इंजेक्शन लगा दिया, लेकिन मरीज़ की मौत के बाद डॉक्टर को पता चला कि ये इच्छा मृत्यु दरअसल एक साज़िश थी. वो एक ऐसे जाल में फंस गया है जो उसकी मौत तक पीछा नहीं छोड़ेगा. सुनिए 'स्टोरीबॉक्स' में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी, इच्छा मृत्यु, का दूसरा हिस्सा. साउंड मिक्सि
इच्छा मृत्यु | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक डॉक्टर क्यों मजबूर था अपने मरीज़ की जान लेने के लिए? उसने ऑपरेशन थियेटर में अपने मरीज़ का क़त्ल किस तरह प्लान किया कि वो देखने में हादसा लगे? क़ातिल डॉक्टर का नैशनल हॉस्पिटल में भर्ती उस मरीज़ से क्या रिश्ता था, जिसने कोर्ट से अपने लिए मांगी थी इच्छा मृत्यु, सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह
पैदल जाती एक औरत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक रोज़ बुआ अचानक कहीं गुम हो गईं. हमने बहुत ढूंढा उन्हें, रेलवे स्टेशनों पर, बस अड्डों पर, मंदिरों में और हर उस जगह जहां वो हो सकती थीं लेकिन वो नहीं मिलीं. कहां गईं थीं बुआ, क्या इसलिए गायब हुईं क्योंकि फूफा उस पर हाथ उठाते थे या इसलिए क्योंकि वो इस दुनिया से ऊब गई थीं... सुनिए अतुल तिवारी की लिखी कहानी 'पैदल जाती एक औरत' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
वहम - पार्ट 2 | स्टोरीबॉक्स विथ जमशेद
विक्रांत हमेशा कहता रहा कि फ़बीहा असल में थी, लेकिन सारे सबूत यही इशारा कर रहे थे कि फ़बीहा नाम की कोई लड़की कभी थी ही नहीं. क्या डॉ खान और इंस्पेक्टर कुशाल सुलझा पाएंगे इस गुत्थी को? क्या था कहानी के पीछे का असल राज़? - सुनिए 'वहम' के दूसरे और आख़िरी हिस्से में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: अमन पाल
वहम | स्टोरीबॉक्स विथ जमशेद
पागलख़ाने की अंधेरी कोठरी से विक्रांत बार-बार चीखते हुए कहता था कि फ़बीहा उसकी एक दोस्त थी, उसके साथ थी. लेकिन पुलिस का मानना था कि फ़बीहा नाम की कोई लड़की कभी थी ही नहीं, वो सिर्फ़ विक्रांत के मन का वहम था - सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'वहम' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: रोहन भारती और अमन पाल
पर्दा | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
चौधरी साहब के दादा एक ज़माने में दारोग़ा थे, बढ़िया आमदनी थी, ठाठ थे. उनके दो बेटे हुए फिर दोनों बेटों के बच्चे. जब ये बच्चे बड़े हुए तब तक चौधरी खानदान के पास न तो खानदानी दौलत बची थी और न ही रईसी... लेकिन पीरबख्श ने अपने दादा के वक्त की इज़्ज़त को ढोल में पोल बना रखा था. घर के अंदर भले सब फटे हाल थे लेकिन दरवाज़े पर ऐसा रेशमी पर्दा लटकाया था कि लगता था बड़ी शान वाले लोग हैं - सुनिए यशपाल की लिखी
मरीज़ की आख़िरी ख़्वाहिश | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
नव्या की ज़िंदगी बस कुछ पलों की मेहमान थी, डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे. नव्या ने अपने पिता दीवान साहब, जो कचहरी में बड़े क्लर्क थे, उन्हें अपनी एक अजीब आख़िरी ख्वाहिश बताई. सुनिए एक शादीशुदा डॉक्टर और एक मरती हुई मरीज़ के बीच पनपते हुए एक अनकहे रिश्ते की कहानी - मरीज़ की आख़िरी ख्वाहिश स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
मुशायरे में भैंस | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
हकीम अहसानुल्लाह साहब के पास एक ऐसा नुस्खा था जिसके बारे में कहा जाता था कि बेऔलाद लोग अगर पान में दबाकर खा लें तो औलाद हो जाती है. शायरी के शौकीन हकीम साहब जब मुशायरे में पहुंचते तो देखते कि लोग वहां अपनी भैंस लेकर आए होते थे कि हकीम साहब एक पान इसे भी खिला दें - सुनिए मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी की एक तहरीर 'धीरजगंज का मुशायरा' का एक हिस्सा स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्स: सूरज स
दिल आज शायर है | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
वो शायर था लेकिन उसका असली काम कब्रें खोदना था. वो उसी कब्रिस्तान में रहता था जहां काम करते हुए उसके पिता ने उसे शायरी भी सिखाई और कब्र खोदना भी... वही पिता जिनके साथ हुए एक हादसे को वो उनकी मौत के बाद भुलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एक रोज़ कब्रिस्तान के गेट पर उसे एक खूबसूरत चेहरा दिखाई दिया और उसे पता चला एक राज.... सुनिए कहानी 'दिल आज शायर है' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मि
अख़बार में नाम | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उस आदमी की ख्वाहिश बस इतनी थी कि वो अख़बार में अपना नाम छपा हुआ देखना चाहता था. इस एक ख्वाहिश के लिए वो कुछ भी करने को तैयार था. तो उसने अपनी मौत का प्लान बनाया. सुनिए यशपाल की लिखी कहानी 'अख़बार में नाम' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
किराए का मकान | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उन्हें किराए का मकान चाहिए था लेकिन उनके पास कोई कागज़ नहीं था. उनकी भाषा भी अलग थी और कपड़े भी कुछ अलग परिवेश के थे, पर उनकी एक कहानी थी. एक उदास कहानी जो उन्होंने बताई तो मैं ना नहीं कर पाया लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे उनकी ख़ौफनाक सच्चाई पता चली... सुनिए कहानी 'किराए का मकान' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग - सूरज सिंह
साग-मीट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
"मेरे तो तीन-तीन डिब्बे घी के महीने में निकल जाते हैं. नौकरों के लिए डालडा रखा हुआ है लेकिन कौन जाने ये मुए हमें डालडा खिलाते हों और खुद देसी घी हड़प जाते हों. आज के ज़माने में किसी का एतबार नहीं किया जा सकता, मैं ताले तो लगा नहीं सकती. ये दूसरा नौकर मथरा सात रोटियां सवेरे और सात रोटियां गिनकर शाम को खाता है और बहन, बीच में इसे दो बार चाय भी चाहिए... और घर में जो मिठाई हो वो भी इसे दो. लेकिन मैं क
एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
वो नास्तिक थे, कभी किसी धर्म या मज़हब को नहीं माना... पूरी ज़िंदगी कहते रहे कि मौत के बाद कुछ नहीं है... एक रोज़ अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और दुनिया से विदा हो गए... अंधेरे के उस पार दोबारा उनकी आंख खुली, वो एक अजीब जगह थी... और सामने थे गॉड - सुनिए स्टोरीबॉक्स में कहानी 'एक नास्तिक की GOD से मुलाक़ात' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग : अमन पाल
एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
साल की आखिरी रात थी. पूरा शहर जश्न में डूबा हुआ था, लेकिन तभी पुलिस की तरफ़ से ऐलान हुआ कि कुछ संदिग्ध शहर में देखे गए हैं. उन दिनों मैं एक कैफे़ में सिक्योरिटी ऑफ़िसर के तौर पर काम कर रहा था. मैं ऑन-ड्यूटी था कि तभी मेरी नज़र एक शख्स पर पड़ी जो जश्न मना रहे लोगों को घूर रहा था... कौन था वो आदमी? उसके इरादे क्या थे? सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'एक क्रिमिनल की न्यू ईयर नाइट' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी
एक फ़र्ज़ी इंटलैक्चुअल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक थे बन्ने भाई, कानपुर में उनकी कोयले की दुकान थी जहां दिन भर वो ग्राहकों के साथ झकमारी करते थे लेकिन शाम को घर आते ही सफ़ेद सिल्क का कुर्ता-पायजामा पहनते, कंधे पर डाल लेते एक नकली पशमीना शॉल और फिर मोहल्ले के पास वाली चाय की दुकान पर बैठकर ऐसी फलसफ़ी टाइप की बातें करते थे कि लगता था उनसे बड़ा बुद्दिजीवी, उनसे बड़ा इंटलैक्चुअल पूरे शहर में कोई नहीं है. मीर-ओ-ग़ालिब की शायरी हो या मुल्कों की सियास
बीवी कैसी होनी चाहिए? | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
डिप्टी साहब वैसे तो आदमी बड़े सख्त मिज़ाज थे. दफ़्तर में तो उनके एक दस्तखत से बड़े-बड़े फ़ैसले हो जाते थे लेकिन घर में डिप्टी साहब की ज़रा नहीं चलती. बेगम साहिबा ज़रा गुस्से वाली थीं और जिस सुबह उन्हें ग़ुस्सा आ गया तो फिर लोग देखते थे कि बेचारे डिप्टी साहब का क्या हाल होता था. एक सुबह मैं किसी फ़ाइल पर उनके दस्तखत लेने उनके घर पहुंचा तो देखा कि डिप्टी साहब कमीज़ और टाई लगाए कुर्सी पर बैठे थे मगर
वो शायर अधूरे ख्वाबों का | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक शायर था जिसकी तस्वीरें गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों के तकियों के नीचे मिलती थी... जो इश्क़ भी लिखता था और इंकलाब भी, लेकिन उसके हिस्से आई ज़िंदगी की मायूसी, अधूरी मुहब्बत और एक दर्दनाक मौत. स्टोरीबॉक्स में इस बार सुनिए उर्दू शायर मजाज़ लखनवी की कहानी जमशेद क़मर सिद्दीकी से.
एक राइटर और भूत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक राइटर ने शहर से दूर एक सुनसान किराए के घर में बैठकर नॉवेल लिखने का फैसला किया, लेकिन उस घर में उसकी मुलाकात हुई एक भूत से. एक भूत जिसके पास उस राइटर के लिए एक काम था, जो वो खुद ज़िंदा रहते नहीं कर पाया. अब वो इस काम के लिए उस राइटर को कीमत भी चुकाने वाला था - सुनिए शरदिंदु बंद्योपाध्याय की लिखी कहानी का हिंदी वर्ज़न 'एक राइटर और भूत' स्टोरीबॉक्स मे जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
बॉस की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
घर पर बॉस की दावत थी इसलिए शामनाथ साहब सुबह से तैयारियों में लगे थे. पर्दे बदल दिए गए, मेज़पोश नए बिछाए, अलमारी में सजे बर्तन निकाल लिए गए. यहां तक की सोफे़ के नीचे की गर्द भी साफ की गई थी लेकिन पूरे चमचमाते घर में मां अटपटी लग रही थीं. गांव की मां जो ना ढंग से बोल पाती है, न उसे कुछ आता-जाता है, चेहरा भी अब झुर्रियों से ढक गया है. शामनाथ साहब ने मां की तरफ़ देखा और सोचा कि इनको कहां छिपाया जाए कि
बदसूरती | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
दो बहनों में से एक को खूबसूरती और कॉलेज में मोहब्बत मिली, जबकि बड़ी बहन को बिल्कुल साधारण शक्ल और जीवन. छोटी बहन ने जब पहली बार अपने आशिक़ का खत बड़ी बहन को दिखाया, तो बस यहीं से एक ऐसी हलचल शुरू हुई जिसने दोनों के रिश्ते की बुनियाद हिला दी. इसी एक घटना से जलन, तकरार और एक ऐसा झगड़ा जन्म लेता है जो आगे चलकर दोनों की ज़िंदगी बदल देता है, सुनिए स्टोरीबॉक्स सआदत हसन मंटो कहानी ‘बदसूरती’ जमशेद क़मर सि
एक बौड़म की लव स्टोरी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
वो हमारे कॉलेज के सबसे शरीफ़ स्टूडेंट थे, लड़कियों की तरफ़ देखना तो दूर उनकी परछाईं से भी दूर भागते थे. ढीले कपड़े पहनते थे और सादा खाना खाते थे लेकिन फिर कॉलेज में आई एक अंग्रेज़ लड़की और हम दोस्तों ने रचा एक खेल. उस लड़की के नाम से इन भाई साहब को एक फर्ज़ी ख़त भेजा और फिर जो हुआ जानने के लिए स्टोरीबॉक्स में सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'विनोद' का एक हिस्सा.
एक सुपरहीरो की सच्ची कहानी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सुपरहीरो वो नहीं जो आसमान में उड़ते हैं, बिल्डिंग्स से लटकते हैं या फिर विलेंस को मारते हैं. सुपरहीरो तो वो होते हैं जो ज़िंदगी की तकलीफ़ों, दूरियों और ग़म के बीच कुछ ऐसा कर जाते हैं कि दुनिया उन्हें याद रखती है. ये कहानी है कारगिल के एक ऐसे ही हीरो की. जमशेद क़मर सिद्दीक़ी इस बार स्टोरीबॉक्स में सुना रहे हैं 'एक सुपरहीरो की सच्ची कहानी'.
मिडनाइट मर्डर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक सर्द शाम को पूरे शहर में सनसनी फैल गई जब पता चला कि एक हमलावर ने सियासी पार्टी के नेता पर जानलेवा हमला किया, लेकिन इंसाफ मिलने के लिए ये क्यों ज़रूरी था कि अस्पताल में भर्ती नेता की मौत रात को बारह बजे ही हो. ऐसी क्या मजबूरी थी? - सुनिए स्टोरीबॉक्स की नई कहानी 'मिडनाइट मर्डर' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
मंत्र | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सर्दियों की रात में जब बूढ़ा-बूढ़ी अपनी झोपड़ी में आग के सामने बैठे हाथ ताप रहे थे, तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया और बताया कि डॉ साहब के बेटे को सांप ने काट लिया है - सुनिए मुंशी प्रेमचंद की लिखी कहानी 'मंत्र' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
लॉटरी का टिकट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
तभी मेले के भोंपू से आवाज़ गूंजी, "तो दोस्तों... अब समय है विजेता लॉटरी नंबर बताने का. आज का विनर है लॉटरी नंबर 1 0 0 5". ये सुनते ही मेरे हाथ पांव कांपने लगे क्योंकि यही नंबर तो मेरी लॉटरी पर था. मैंने आंखे मलकर नंबर दोबारा चेक किया, बिल्कुल वही नंबर था - सुनिए कहानी 'लॉटरी का टिकट' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
आधी रात की ख़ामोशी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
रात के ख़ामोश पहर में उस घर में जहां मैं अकेले रहता था, दूसरे कमरे से वो आवाज़ दरअसल कई दिनों से आ रही थी. रात की खामोशी को चीरती हुई वो आवाज़ हर रात मुझे परेशान करने लगी थी. किसकी थी वो आवाज़? और क्या थी उस आवाज़ की दर्दनाक कहानी - सुनिए स्टोरीबॉक्स विद जमशेद में कहानी 'आधी रात की ख़ामोशी'.
चचा मियां की क़ब्र | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सुबह की अज़ान हुई ही थी कि पता चला मुहल्ले के चचा मियां गुज़र गए. वैसे उम्र काफ़ी थी उनकी और लंबे समय से बीमार थे लेकिन उनके जाने के बाद उनकी कब्र को लेकर एक ऐसा मसला खड़ा हो गया कि वो दिन भुलाए नहीं भूलता. सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'चचा मियां की कब्र' स्टोरीबॉक्स में.
एक कागज़ का फूल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
पांच साल के बाद वो अचानक दिखी एक अस्पताल में. ये वही लड़की थी जो हमेशा ब्रैंडेड कपड़े पहनती थी. महंगे शौक रखती थी लेकिन आज उसकी हालत ख़राब थी. कपड़े औसत, बाल बिखरे, चप्पलें घिसी हुई, चेहरे का रंग उड़ा और हाथ में मेडिकल रिपोर्ट्स. ये वही लड़की थी जिसने कभी मेरा इश्क़ ठुकराया था. सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'एक कागज़ का फूल' स्टोरीबॉक्स में.
आख़िरी सिगरेट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
बंदूक मेरी कनपटी पर थी और उंगली ट्रिगर पर. मेरी ज़िंदगी और मौत के बीच बस चंद लम्हों का फ़ासला था, लेकिन तभी मन किया कि ज़िंदगी की एक आख़िरी सिगरेट पी लूं - सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की लिखी कहानी 'स्टोरीबॉक्स' में.
रेंट एग्रीमेंट | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सैलून पर मैंने अभी शेव बनवाना शुरु ही किया था कि मेरे हाउस ब्रोकर का फोन आया और उसने कहा कि कोई मेरा घर किराए पर लेना चाहता है. मैंने हां बोल दिया लेकिन तभी उसने किरायेदार का नाम बताया और वो नाम सुनकर मैं चौंक गया - सुनिए पूरी कहानी स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ.
आतिश हुसैन के साले साहब | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
आतिश साहब को एक रोज़ सड़क पर एक औरत पर्चा पकड़ा गई जिसमें लिखा था कि ये पर्चा आगे एक हज़ार लोगों को छपवाकर बढ़ाइए, अब क्या करेंगे आतिश साहब... क्या वाकई पर्चा नहीं छपवाने पर कुछ बुरा होगा? सुनिए स्टोरीबॉक्स में नई कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ
दो जादूगर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक ट्रेन में मिले दो जादूगर और एक-दूसरे को दिया चैंलेज. कौन है बड़ा जादूगर? उस्ताद और शागिर्द के बीच हुए जादू के मुकाबले में कौन जीता और किसकी हुई हार? सुनिए सत्यजीत रे की लिखी कहानी का ऑडियो वर्जन स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
पुरानी दिल्ली की नहारी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
आजकल जो नहारी दिल्ली में मिलती है वो कोई नहारी है साहब? नहारी तो बंटवारे से पहले मिलती थी दिल्ली में. दुकान का नाम था गंजे भाई की नहारी. ऐसी नहारी कि अलीगढ़ से लेकर लाहौर तक से खाने वाले आते थे. सुनिए कहानी स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
वो कौन था? | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
पारितोष साहब के घर के पास उस शाम मैंने जिस आदमी को देखा वो कौन था और क्या ये सिर्फ़ इत्तिफ़ाक था कि जिस दिन शैंकी गायब हुआ और पारितोष साहब की मौत हुई, वो उस दिन भी दिखाई दिया था - सुनिए नई थ्रिलर कहानी 'वो कौन था' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
चचा छक्कन | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
चचा छक्कन वो आदमी थी कि जैसे ही वो पेंचकस लेकर ख़राब रेडियो खोलने बैठते थे घर वाले नया रेडियो खरीदने का मन बना लेते थे. जानते थे कि जिस चीज़ पर हाथ रख दिया वो खराब होकर रहेगी. एक दिन चचा के ज़िम्मे एक काम आ गया. काम बस इतना था कि एक तस्वीर दीवार पर टांगनी थी. क्या क्या हुआ तस्वीर टांगने में... सुनिए स्टोरीबॉक्स विद जमशेद में इम्तियाज़ अली ताज की लिखी कहानी 'चचा छक्कन'
ये कार बिकाऊ है | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
अगर आप एक पुरानी कार ख़रीदना चाहते हैं तो ध्यान दें। कार वैसे बढ़िया है लेकिन कभी कभी स्पीड ब्रेकर आने पर बोनट खुल कर खड़ा हो जाता है, और गियर वाला लीवर थोड़ा ढीला है तो अपने आप रिवर्स में गिर जाता है जिसकी वजह से गाड़ी सड़क पर आगे जाते-जाते अचानक पीछे चलने लगती है। हॉर्न थोड़ा प्लैनिंग के साथ बजाना पड़ता है यानि अगर आप अभी दबाएंगे तो तीन गली बाद जाकर बजेगा - सुनिए पूरी कहानी स्टोरीबॉक्स में जमशेद
एक चोर की कहानी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
आधी रात को गांव में शोर मचा "चोर.. चोर" लोग अपने घरों से निकलकर आवाज़ की तरफ भागे. किसी ने बताया कि चोर उस खेत में घुस गया है... सब लोग उसी तरफ भागे...एक ने कहा, "खेत को आग लगा देते हैं, खुद बाहर आएगा" जिसका खेत था वो लोगों के पैरों में गिर गया कि ऐसा मत करो, बहुत नुकसान हो जाएगा लेकिन लोग सुनने को तैयार नहीं थे, वो बस चोर को खत्म कर देना चाहते थे.. तभी एक शख्स ने माचिस निकाली - सुनिये श्रीलाल शुक
शायरी की बीमारी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
आग़ा शिराज़ी साहब वैसे तो नेक आदमी थे लेकिन उनको एक बीमारी थी कि हर बात के लिए उनके पास चार शेर होते थे. अगर आप कभी कहें कि मुझे दिल का दौरा पड़ रहा है और मैं मरने वाला हूं एंबुलेंस बुला दीजिए तो कहेंगे "बुलाता हूं लेकिन पहले मौत पर चार शेर सुन लीजिए" - सुनिये एक सनकी शायर की मज़ेदार कहानी स्टोरीबॉक्स में
दफ़्तर का एक दिन | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
ये जो सुबह सुबह बड़े शहरों में आप टिफिन कंधे पर लटकाए मल्टी नैशनल कंपनियों की शीशे की ऊंची-ऊंची इमारतों में दाखिल होते हुए देखते हैं, ये लोग ऑफ़िसों में पूरे दिन क्या करते हैं - जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ सुनिये 'दफ्तर का एक दिन' में
सिगरेट पीने वाले लोग | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सिगरेट पीने वाले दो लोगों की दोस्ती तब होती है जब वो साथ में सिगरेट पीते हैं, वो दोस्ती पक्की तब होती है जब वो एक-दूसरे की सिगरेट पीने लगते हैं और पक्की दोस्ती जिगरी दोस्ती में तब बदलती है जब वो सिगरेट के चक्कर में आपस में झगड़ा करने लगते हैं - सुनिये "सिगरेट पीने वाले लोग" स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
मुखर्जी बाबू की डायरी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
लंदन में रहने वाले मुखर्जी साहब के पास एक डायरी थी जिसमें उन तमाम ख़ूबसूरत औरतों के नाम थे जो उनसे पिछले 15 सालों में मिली थीं. जब भी उनके पास कुछ फ़ुर्सत होती तो डायरी खोलते और लाइन से लिखे नामों पर फोन करने लगते. उन्होंने नामों के आगे ये भी लिख रखा था कि आखिरी बार बात हुई थी तो क्या बात हुई थी. फोन करते ही उसी बात से बात शुरु करते ताकि लगे कि पुरानी जान पहचान है. उस रोज़ भी वो कोई खास मसरूफ़ नही
पापा की कलाई घड़ी | स्टोरीबॉक्स
दुनिया का हर पिता अपनी औलाद की खुशी के लिए तो जीता है. बच्चे की एक मुस्कुराहट के लिए खुद को थोड़ा-थोड़ा रोज़ खत्म करता है. सुनिये कहानी पापा की कलाई घड़ी, सिर्फ स्टोरीबॉक्स पर
इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
चांद की सरकार को ये सिखाने के लिए कि कम मेहनत में ज़्यादा क्रिमिनल कैसे पकड़े जाएं, देश की सरकार ने अपने कर्मठ कर्मचारी इंस्पेक्टर मातादीन को चांद पर भेजने का फैसला किया. फिर क्या हुआ? जानने के लिए सुनिए हरिशंकर परसाई की लिखी कहानी ‘इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर’, स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी के साथ.
मेरी पुरानी कमीज़ | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
आदमी के कपड़े क्या उसकी शख्सियत तय करते हैं? कोई कहता है हां और कोई कहना है ना, तो भइय्या मैंने अपनी बीवी से लगाई शर्त और फटी पुरानी कमीज़ पहनकर चल दिये डॉक्टर साहब की क्लीनिक. क्या हुआ वहां, सुनिए स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी से 'मेरी पुरानी कमीज़' में.
तुम्हारे पास कोई दास्तां है? | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उसकी नींद का कमरा अजीब-अजीब सपनों के काले पर्दों से ढका था. घबरा कर उठ जाना जाने नियति थी या आदत लेकिन हर बार यूँ पसीने से लथपथ घबराई सी हालत में उठने के बाद वह सबसे पहले अपना चेहरा देखने की कोशिश करती. जब भी वह जागती तब गाल पर, हथेलियों पर, कलाईयों पर अलग अलग से निशान मिला करते. सुंदर होना उसके लिए अभिशाप बन गया था. सुनिए सुष्मा गुप्ता की लिखी कहानी 'तुम्हारे पास कोई दास्तां है' स्टोरीबॉक्स में ज
पुराना चावल | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
किसकी बिरयानी सबसे बढ़िया? ये एक ऐसा सवाल है जिसको लेकर आए दिन हैदराबाद, लखनऊ और दिल्ली वाले आपस में तूतू-मैंमैं किया करते हैं. यही बहस एक दिन शुरु हो गयी मोहल्ले की चाय की टपरी पर जहां मौजूद थे एक हैदराबादी, एक लखनऊ और एक दिल्ली वाले. बहस में किस शहर की हुई जीत? सुनिए जमशेद कमर सिद्दीक़ी से स्टोरीबॉक्स में
प्रेमी के साथ एक सफ़र | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सामने वाली सीट पर बैठी उस लड़की को जब मैं देखने लगा तो काका बोले, "सुनो तुम मत देखो. मैं देख सकता हूं. इस देश में बूढ़े लोगों को प्रिवलेज मिला है कि वो किसी को भी देख सकते हैं लेकिन तुम मत देखो, तुम अभी जवान हो" पेश है सटायर के उस्ताद हरिशंकर परसाई की लिखी कहानी 'प्रेमी के साथ एक सफर'
लखनऊ वाले चुस्सी पहलवान | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
पुराने लखनऊ में अकबरी गेट के पास चाय की दुकानों पर अख़बार पढ़ते दिखाई देने वाले चुस्सी पहलवान को इस बार नया शिगूफ़ा मिला. ज़मीन के नीचे दबी गड़ी हुई दौलत तलाशने का. सुनिए कहानी ‘स्टोरीबॉक्स’ में.
नफरत Online | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
मुल्क में हालात खराब थे. हर तरफ नफरत की आग धधक रही थी. सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से नाराज़गी साफ दिख रही थी. और ऐसे समय में समर्थ को अंसारी साहब के दरवाज़े पहुंचना था, उस गली में जहां उसका बचपन गुज़रा था, पर अब वो इलाका उसका 'अपना' नहीं रहा था. सुनिए पूरी कहानी 'नफरत ऑनलाइन' स्टोरीबॉक्स में.
मुझे मरे हुए लोग दिखते हैं | हॉरर स्टोरी| स्टोरीबॉक्स
वो सात साल का बच्चा स्कूल के अकेले कमरे में किससे बातें करता था? वो कौन था जो हमेशा उसके साथ रहता था लेकिन और किसी को दिखाई नहीं देता था? सुनिए कहानी 'मुझे मरे हुए लोग दिखते हैं' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
अल्लाह मियां का बैंगन | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
जब जेब में आखिरी अठन्नी बची तो मैं बाज़ार से बैंगन खरीद लाया लेकिन बावर्ची खाने में जब बीवी ने बैंगन को काटा तो उसमें उसे कुछ अजीब सा निशान दिखाई दिया जिसे ग़ौर से देखो तो लग रहा था 'अल्लाह' लिखा है - सुनिए स्टोरीबॉक्स में कहानी अल्लाह मियां का बैंगन
वो जीनियस लड़का | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
वो लड़का हर सवाल के सही जवाब देता था चाहे आप उससे इतिहास पर पूछिए या राजनीति पर, धर्म पर पूछिये या विज्ञान पर. उसे सब पता था लेकिन उस जीनियस लड़के की एक बचकानी ख्वाहिश भी थी जो कोई नहीं जानता था. सुनिये स्टोरीबॉक्स में कहानी - वो जीनियस लड़का
आशिक़ अली की ईद मुबारक | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
आशिक़ अली ने ईद का दिन चुना था अपनी मुहब्बत के इज़हार के लिए लेकिन क्या उन्हें मिल पाएगी मुहब्बत की ईदी? सुनिए स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
कलकत्ता की एक रात | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
अजनबी शहर में उस अजनबी औरत ने अचानक मेरे कान के पास आकर कहा, "सच जानना है तो मेरे साथ आइये" पता नहीं मैं उसकी खूबसूरती से मुतास्सिर था या उसके अंदाज़ से मैं उसके पीछे चल दिया - सुनिए चतुर्सेन शास्त्री की कहानी 'कलकत्ता की एक रात' स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
जिलानी साहब की दावत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
जिलानी साहब के बेटे की सगाई में बड़ी दावत का इंतज़ाम था लेकिन ऐन वक्त पर जब लोग खाने का लुत्फ़ ले रहे थे तो पता चला कि कुछ लोग बिन बुलाए दावत में घुस आए हैं - कैसे पकड़ेंगे उन बिन बुलाए लोगों को जिलानी साहब - सुनिए स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
शेष रहेगा प्रेम | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
नब्बे के दशक की एक उदास प्रेम कहानी जिसमें तृष्णा और केशव ने प्रेम की एक नई परिभाषा गढ़ी जो सदियों तक याद की जाएगी. सुनिए रश्मि कुलश्रेष्ठ की लिखी कहानी 'शेष रहेगा प्रेम' का एक हिस्सा स्टोरीबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.
शापित? स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
एक ज़मीन जो अपनों का खून मांगती थी और उसके बदले में देती थी लहलहाती फसल. ज़मीन से पैदावार निकालने के इस लालच भरे खेल में बहा बेइंतिहा खून और काट कर डाल दी गयी अपनों की लाशें - सुनिए पूरी कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से. साउंड मिक्सिंग: रोहन भारती
मां कहां है? | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
नफ़रत की आग में पूरा शहर जल रहा था. हर तरफ लाशों के ढेर लगे थे. कहीं से हर हर महादेव के नारे की आवाज़ आती थी कहीं से अल्लाह हुअकबर की. यूनुस खान नाम का बलोच अपने ट्रक से गुज़र रहा था कि उसे सड़क किनारे एक छोटी बच्ची खून से लथपथ दिखाई दी - सुनिए कृष्णा सोबती की लिखी कहानी 'मां कहां है' साउंड मिक्सिंग: रोहन भारती
मेरी मम्मी का लव लेटर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उस दोपहर घर के कबाड़ वाले कमरे में कुछ ढूंढते हुए मेरी नज़र एक पुरानी किताब पर पड़ी. धूल से पटी वो किताब कोई नॉवेल थी. मैंने उसे खोला तो अंदर से एक कागज़ सरक कर नीचे गिरा. मैंने पढ़ा तो वो ख़त उनके प्रेमी का था. सुनिए पूरी कहानी स्टोरीबॉक्स में. साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह
वीकेंड के क्रांतिकारी | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
बहुत पुराने वक्त की बात है. एक शहर था जहां सब कुछ ठीक था. ठीक इसलिए था क्योंकि उस शहर में कोई किसी से शिकायत नहीं करता था. लोगों में ज़ब्त का बड़ा माददा था. उदास चेहरे , भूख और बेकारी तो थी लेकिन फिर भी सब कुछ ठीक था. लोग अपने शहर के हुक्मरान से प्यार करते थे. क्रांति स्थगित थीं क्योंकि क्रांतिकारियों को दफ़्तर से छुट्टी नहीं मिलती थी लेकिन हां कुछ क्रांतिकारी वक्त निकालकर वीकेंड-वीकेंड पर क्रांति
पहली सी मुहब्बत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
हम उस जेनरेशन से आते हैं जो इश्क़ करना फिल्मों से सीखती है जहां हर पल कुछ हो रहा होता है. कोई शरारत, कोई बात, कोई बातचीत. हम समझते हैं कि इश्क़ में ऐसा ही होता है और अगर ये नहीं है तो इश्क़ बोरिंग है लेकिन हकीकत ये है कि इश्क़ उन शादीशुदा पुराने लोगों के बीच भी होता है जो एक कमरे में बैठे बिना बात किये खामोशी से अपना अपना काम करते रहते हैं. उनका इश्क़ वक्त के साथ मैच्योर हो जाता है - सुनिये कहानी
मुझे बच्चों से बचाओ | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
हमारे मुहल्ले में एक साहब रहते हैं जिनके 6 बच्चे हैं और सारे के सारे बच्चे इतने शैतान कि जिस तरफ जाते हैं लगता है टिड्डी किसी खेत पर हमला करने जा रहे हैं. एक रोज़ वो साहब अपने सारे बच्चों और बीवी के साथ हमाए घर मोहल्लेदारी करने आ गए. बच्चों ने पूरे घर का जायज़ा इस तरह लेना शुरु कर दिया जैसे वो किसी कमरे में नहीं, किसी जंगल में आए हों. उसके बाद दो बच्चों ने टार्ज़न की तरह खौफनाक चीख अपने हलक से नि
चलो एक बार फिर से | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
"दुनिया में औलाद और मां-बाप की ये कहानी हज़ारों बार दोहराई जा चुकी है पर ये कहानी है कि कभी पुरानी नहीं होती. ये कहानी तब तक दोहराई जाएगी जब तक औलादें उतनी मुहब्बत अपने मां-बाप से करना नहीं सीखेंगी. फिक्र मत करो, घर तुम्हारे नाम कर दिया है बेटा" - सुनिये उम्र के आखिरी मोड़ पर खड़े एक शख्स की आखिरी मुहब्बत और उसके बेटे की नाराज़गी की कहानी - चलो एक बार फिर से - स्टोरीबॉक्स में जमशेद कमर सिद्दीक़ी स
कौन बशारत अली? स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
उनकी हर बात 'नहीं' से शुरु होती थी. मान लीजिए आप उनसे कहें कि आज बड़ी सर्दी है, वो कहेंगे "नहीं, कल ज़्यादा पड़ेगी" आप कहिए, "मैं कल सड़क पर फिसल कर गिर गया" वो फौरन कहेंगे, "नहीं, ये तो कुछ भी नहीं, मैं तो एक दफ़ा ऐसा फिसला था कि क्या बताऊं, हुआ यूं कि..." और फिर किस्सा शुरु कर देंगे. हमेशा चूड़ीदार पैजामा पहनते थे औक मूंछों पर ताव देते थे. पैजामा के इज़ारबंद में चाबियों का गुच्छा बंधा रहता था. उ
दा निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस में मिले दो अजनबी खेलते हैं ट्रेन में कौन सा ख़तरनाक खेल? सुनिए जमशेद क़मर सिद्दीक़ी की नई थ्रिलर कहानी - दा निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस
The New Year Psycho | दा न्यू ईयर साइको | स्टोरीबॉक्स
वो नए साल की रात थी... चैपल स्ट्रीट से घर लौटते एक शख्स को एक औरत की लाश पड़ी मिली... लाश का सर धड़ से अलग था. और उसे बेरहमी से मारा गया था. जिस्म के सारे नाखून खींच लिये गए थे और सर से सारे बाल नोच लिये गये थे. पुलिस को ख़बर की गयी लेकिन जबतक पुलिस पहुंची तब तक इलाके में एक और कत्ल हो गया. दो रोज़ के बाद पुलिस को एक खत मिला जिसमें कातिल ने कहा था कि कत्ल का ये सिलसिला अब तब ही रुकेगा जब इस दुनिया
मेरे पति की पतलून | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
"तुम कहना क्या चाहती हो, क्या ये कह रही हो कि मैं नहाता नहीं हूं, मैं तो रोज़ नहाता हूं बल्कि दिन में दो बार नहाता हूं" - "देखिए, दो डोंगा पानी डाल कर पोछ लेने को नहाना नहीं कहते, कभी बाथरूम में रखी वो लाल रंग की टिकिया देखी है उसे साबुन कहते हैं, कभी इस्तेमाल की है वो" - "नहीं, मैं साबुन नहीं लगाता क्योंकि साबुन में तेज़ाबी चीज़ें होती हैं और उससे स्किन ख़राब हो जाती है" - सुनिए मंटो के लिखी एक क
कफ़न चोर | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
सर्द रात में उसकी बेटी बुखार से बुरी तरह से तप रही थी लेकिन उसकी जेब में इतना पैसा भी नहीं था कि एक चादर ख़रीद सकता. बेटी अपनी कंपकपी छुपा रही थी ताकि बूढ़ा बाप अपनी बेबसी पर कम शर्मिंदा हो लेकिन उसके कांपते हुए होंठ उसका साथ नहीं दे रहे थे. बाप उठा और कब्रिस्तान की तरफ चल दिया - सुनिए कहानी जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
एक चुगलख़ोर की मौत | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
चुगलखोर चाचा जब मर कर दूसरी दुनिया में पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वो तो दोज़ख में भेज दिये गए हैं। वहां उन्होंने क्या किया कि उन्हें वापस जन्नत भेजा गया और आखिर क्यों उन्हें जन्नत रास नहीं आई - सुनिए पूरी कहानी स्टोरबॉक्स में जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से
ठाकुर का कुआं | स्टोरीबॉक्स विद जमशेद
बात सिर्फ एक ग्लास पानी की थी लेकिन घर में रखा पानी बदबूदार था. उसका गला इस क़दर सूख गया था कि बस मरने ही वाला था और पूरे गांव में सिर्फ एक कुआं था जहां पानी मिल सकता था और वो था ठाकुर साहब का कुआं. उस कुएं से पानी पीना उसके लिए मना था लेकिन उसकी पत्नी ने फैसला किया कि वो आधी रात को जाएगी पानी लेने के लिए - सुनिए कहानियों के बादशाह मुंशी प्रेमचंद की लिखी कहानी 'ठाकुर का कुआं' स्टोरीबॉक्स में जमशेद
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