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Janvi Kapdi 7 episodes Latest Jul 30, 2024

यह पॉडकास्ट श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों पर आधारित है, जो महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिए थे। इसमें गीता के 18 अध्यायों और 700 श्लोकों की व्याख्या की गई है। यह ज्ञान लगभग 5560 वर्ष पहले दिया गया था और आज भी प्रासंगिक है।

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आत्म संयम योग Jul 30, 2024 00:26:21 अध्याय 5 – आत्मसंयम योग (कर्म संन्यास और योग)1. संन्यास और कर्मयोग में अंतरअर्जुन पूछते हैं: “हे कृष्ण! कर्म त्याग (संन्यास) श्रेष्ठ है या कर्मयोग (कर्म करते हुए योग)?”कृष्ण बताते हैं:संन्यास: दुनिया के कर्मों से मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग।कर्मयोग: दुनिया में रहते हुए, अपने कर्तव्य को बिना आसक्ति किए निभाने का मार्ग।निष्काम कर्मयोग संन्यास से भी श्रेष्ठ है, क्योंकि इसमें मन और इन्द्रियाँ सक्रिय र
Gyan karm sanyas yog Aug 2, 2023 00:13:28 अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग1. गीता ज्ञान की परंपराश्रीकृष्ण बताते हैं कि यह योग अमर है।पहले सूर्यदेव (विवस्वान) को, फिर मनु को, और उसके बाद राजऋषियों को यह ज्ञान दिया गया।समय के साथ यह परंपरा लुप्त हो गई, इसलिए अब कृष्ण स्वयं अर्जुन को वही दिव्य ज्ञान प्रदान कर रहे हैं।कृष्ण कहते हैं:“जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ।”धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करना
Karm yog Aug 10, 2022 00:13:39 अध्याय 3 – कर्म योग (निष्काम कर्म का योग)1. अर्जुन का प्रश्नअर्जुन पूछते हैं – “हे कृष्ण! यदि ज्ञान (सांख्य) को श्रेष्ठ मानते हैं, तो मुझे युद्ध (कर्म) के लिए क्यों प्रेरित करते हैं?”यहाँ अर्जुन का भ्रम है कि क्या केवल ज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है या कर्म भी आवश्यक है।कृष्ण स्पष्ट करते हैं:केवल कर्म-त्याग से मुक्ति नहीं मिलती।हर कोई कर्म करने को बाध्य है, क्योंकि प्रकृति हमें कर्म करने के लिए प्रेरि
Sankhya yog part 2 May 4, 2022 00:24:35 सांख्य योग – भाग 2 (अध्याय 2 का उत्तरार्ध)1. निष्काम कर्म का सिद्धांत (Karma Yoga का बीज)कृष्ण अर्जुन से कहते हैं –👉 “तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों पर कभी नहीं।”कर्म करना मनुष्य का कर्तव्य है।फल की आसक्ति (लालच या भय) मन को बाँध लेती है।जब हम केवल कर्म पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो मन स्थिर और शांत होता है।कृष्ण बताते हैं कि स्थितप्रज्ञ पुरुष (जिसका ज्ञान स्थिर हो गया हो) कैसा होता
Sankhya yog May 2, 2022 00:26:44 अध्याय 2 – सांख्य योग (ज्ञान योग)स्थितिअर्जुन युद्ध न करने का निश्चय कर चुके हैं और अपने धनुष को नीचे रखकर श्रीकृष्ण से कहते हैं –"हे कृष्ण! मैं आपका शिष्य बनकर आपसे पूछता हूँ, कृपया मुझे निश्चित रूप से बताइए कि मेरे लिए क्या श्रेयस्कर है।"यहीं से कृष्ण उन्हें दिव्य ज्ञान देना प्रारम्भ करते हैं।आत्मा अमर हैआत्मा (आत्मन्) न जन्म लेती है और न मरती है।शरीर नश्वर है लेकिन आत्मा शाश्वत है।मृत
Arjun vishad yog May 2, 2022 00:28:12 स्थिति:महाभारत युद्ध शुरू होने वाला है। दोनों सेनाएँ कुरुक्षेत्र के मैदान में आमने-सामने खड़ी हैं। अर्जुन अपने रथ पर खड़े होकर जब युद्धभूमि को देखते हैं, तो उन्हें अपने ही गुरु, बंधु, कुटुंब और मित्र शत्रु पक्ष में दिखाई देते हैं।क्या हुआ:अर्जुन अपने धनुष को थामे खड़े हैं, परंतु उनका हृदय करुणा और मोह से भर जाता है।वे सोचते हैं कि जिनके लिए युद्ध करना है, यदि वही लोग मारे गए तो राज्य, सुख और विजय
Shree mad bhagwat geeta Mar 11, 2021 00:00:23 🎙️ “नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका इस पॉडकास्ट में। आज हम बात करेंगे उस दिव्य ग्रंथ की, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर अर्जुन को सुनाया था – श्रीमद्भगवद्गीता। इसमें कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, और हर अध्याय जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर गहरी शिक्षा देता है। आने वाले एपिसोड्स में मैं आपको इन्हीं 18 अध्यायों के बारे में विस्तार से बताऊँगी—किस अध्याय में क्या संदेश है, और वे हमारी र

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